Homeपॉलिटिक्सआदित्य ठाकरे ने दी चाचा राज ठाकरे को नसीहत

आदित्य ठाकरे ने दी चाचा राज ठाकरे को नसीहत

महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे ने शुक्रवार को अपने चाचा राज ठाकरे को नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के बजाय, उन लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल केंद्र पर तंज करते हुए बढ़ती महंगाई, पेट्रोल, डीजल या सीएनजी की कीमतों के बारे में बोलने के लिए किया जाना चाहिए। मंत्री ने लाउडस्पीकर विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा, “किसी को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी के बारे में बोलना चाहिए और हाल के 2-3 वर्षों पर ध्यान देना चाहिए, न कि पिछले 60 वर्षों पर।”

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महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे का यह बयान महाराष्ट्र नव निर्माण सेना प्रमुख और अपने चाचा राज ठाकरे के उस बयान के बाद आया है। जिसमें राज ठाकरे ने सरकार को चेतावनी दी थी कि सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकरों को हटा लिया जाए। रागुड़ी पड़वा रैली में राज ठाकरे द्वारा उठाई गई मस्जिदों के बाहर से लाउडस्पीकर हटाने की मांग एक बड़े विवाद में बदल गई है, जिसका असर अन्य राज्यों में भी महसूस किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा एवीबीपी ने अलीगढ़ जिला प्रशासन से प्रमुख चौराहों पर हनुमान चालीसा बजाने के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति मांगी है। कर्नाटक की मस्जिदों को लाउडस्पीकर की डेसीबल सीमा पर पुलिस के आदेश मिले हैं।

राज ठाकरे ने अपनी धमकी दोहराई और सरकार को 3 मई तक का समय दिया है जिसके पहले सभी लाउडस्पीकरों को हटाने को कहा गया है नहीं तो धमकी दी है कि उनकी पार्टी के लोग मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा बजाएंगे।

राज ठाकरे पर बरसी राज्य सरकार
महाराष्ट्र सरकार ने मनसे के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि सरकार किसी को भी राज्य का माहौल खराब नहीं करने देगी. जबकि शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि डेसिबल के स्तर के बारे में नियम पहले से ही मौजूद हैं, उपमुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजीत पवार ने कहा कि राज ठाकरे को इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। राकांपा नेता जयंत पाटिल ने पहले कहा था कि राज ठाकरे भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं।

इस बीच, राज ठाकरे के हाई डेसीबल लाउडस्पीकरों को हटाने के आह्वान के बाद पिछले कुछ दिनों में एमएनए के कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। मनसे के सचिव इरफान शेख ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए कहा, “समय आ गया है कि ‘जय महाराष्ट्र’ (अलविदा) कहा जाए, जिस पार्टी के लिए काम किया और जिसे सब कुछ माना जाता है, वह उस समुदाय के खिलाफ घृणित रुख अपनाती है।”

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