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वन विभाग के अनुसार लखनऊ में 8.33 वर्ग किलोमीटर बढ़ा वन क्षेत्र का दायरा

लखनऊ, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह अच्छी खबर है। अनगिनत पेड़ों पर हरियाली चलने के बाद भी लखनऊ में वन क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (भारतीय वन सर्वेक्षण ) की नई रिपोर्ट में लखनऊ के वन क्षेत्र में 8.33 वर्गकिलो मीटर की वृद्धि हुई है। यह रिपोर्ट वर्ष 2021 के आधार पर ही तैयार की गई है।

हर दो साल में यह सर्वेक्षण होता है और लखनऊ का वन क्षेत्र 2021 में 387 वर्ग किलोमीटर पहुंच गया है, जो 2019 में 378.67 वर्गकिलोमीटर था। पर्यावरण को सुरक्षित करने में यह अच्छे हो सकते हैं लेकिन दूसरी तरफ घने पेड़ों पर आरी चलाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। मलिहाबाद और काकोरी के आम पट्टी क्षेत्र में हर कुछ दिन बाद पेड़ों पर अवैध तरह से आरी चल रही हैं।

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इस साल भी 34 लाख पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा है लेकिन पिछले सालों में भी वन क्षेत्र बढ़ाने में कामयाबी मिली है। केंद्र सरकार का निर्देश है कि भौगोलिक क्षेत्र का हरित कवर 33 प्रतिशत होना चाहिए और लखनऊ के भौगोलिक क्षेत्र के हिसाब से हमारा हरित कवर 15.32 प्रतिशत हो गया है। उत्तर प्रदेश में हरित कवर छह प्रतिशत है। नगर वन क्षेत्र बनाने के साथ ही हरित पट्टी और वेटलैंड को सुरक्षित करने की दिशा में काम चल रहा है। –डा. रवि कुमार सिंह, डीएफओ लखनऊ अवध क्षेत्र

2019 की रिपोर्ट से भी एक सुखद खबर आई थी। सभी पौधों की जियो टैगिंग कराने से यह पता चल पाया था कि रोपे गए पौधो में अधिकांश जीवित पाए गए थे। यह रिपोर्ट भी भारतीय वन सर्वेक्षण ने दी थी, शहर में 95 प्रतिशत और ग्रामीण इलाके में 75 प्रतिशत पौधे मरने से बच गए थे।

पानी बचाने में हर सजग नहींः हरियाली को बढ़ाने में हमारे कदम ठीक बढ़ रहे है लेकिन भूजल बचाने में लखनऊ कई शहरों से पिछड़ता दिख रहा है। लखनऊ में ही दस से 15 वर्षों में भूजल दस से बारह मीटर तक नीचे गया है। लखनऊ में हर दिन करीब 40 लाख लीटर भूजल का दोहन प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में होता है। नलकूपों से 35.6 करोड़ लीटर पानी हर दिन भूगर्भ से निकाला जा रहा है।

महानगर, अलीगंज, अमीनाबाद, इंदिरानगर, हजरतगंज, लालबाग, आलमबाग, कैंट और गोमतीनगर में तो भूजल नीचे खिसकता जा रहा है। लखनऊ शहर में 48 प्रतिशत क्षेत्रफल में भूजल का स्तर में 25 मीटर तक गिर गया है। भूगर्भ जल वैज्ञानिक आरएस सिन्हा कहते हैं कि भूजल का गिरता स्तर हर किसी के लिए चिंता का विषय है। शहरी क्षेत्र में नलकूपों को लगाने पर रोक के साथ ही दूर इलाकों में नलकूप लगाकर पाइपों पानी को शहरी क्षेत्र में लाना होगा।

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