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ईद के उपलक्ष्य में दो दिन बंद रहेगा इलाहाबाद हाईकोर्ट, 4 से फिर होगी सुनवाई

लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट और कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में ईद पर दो दिन का अवकाश रहेगा। ईद पर्व को लेकर पसोपेश के बीच में कोर्ट में दो और तीन मई को अवकाश घोषित किया गया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट तथा लखनऊ खंडपीठ में तीन मई को ईद की छुट्टी रहेगी। इसी तारतम्यता में दो मई को भी अवकाश घोषित कर दिया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में मैनेजर आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट में जिन केस की तारीख दो मई को लगाई गई थी, अब उन पर चार मई को सुनवाई होगी। तीन मई को भी अवकाश रहेगा। पांच मई को कोर्ट में चार तथा पांच मई वाले केस की सुनवाई की जाएगी।

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मथुरा डीएम नवनीत चहल को पुलिस अभिरक्षा में 12 को कोर्ट में पेश करने का निर्देश : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी मथुरा नवनीत चहल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है और पुलिस अभिरक्षा में उन्हें 12 मई को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। सीजेएम के माध्यम से वारंट जारी होगा। आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने बृजमोहन शर्मा की अवमानना याचिका पर जिलाधिकारी पर कोर्ट की जानबूझकर अवज्ञा करने और आदेश के विपरीत अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर अपील सुनने जैसा निर्णय लेने पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट की गरिमा एवं मर्यादा कायम रखने और न्याय व्यवस्था पर जन विश्वास बनाए रखने के लिए कोर्ट आंख बंद नहीं कर सकती। कहा जिलाधिकारी से उम्मीद की जाती है कि उसे इस बेसिक कानून की जानकारी होगी कि कोर्ट आदेश पर रोक नहीं है तो वह लागू रहेगा और प्राधिकारी को उसका पालन करना बाध्यकारी होगा। इसके बावजूद जिलाधिकारी ने कोर्ट की अवज्ञा की है।

जिलाधिकारी ने याची को नियमित किये जाने से पहले की सेवा को क्वालीफाइंग सेवा नहीं माना और कहा वह पेंशन पाने का हकदार नहीं हैं। हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद कर दिया और 1996 से याची की सेवा मानते हुए पेंशन निर्धारित करने का आदेश दिया। पालन न करने पर कोर्ट ने नोटिस जारी की और अनुपालन रिपोर्ट मांगी। जिलाधिकारी ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर कहा कि कोर्ट आदेश की पुनर्विचार अर्जी दी गई है। उसके तय होने तक याची पेंशन पाने का हकदार नहीं हैं। जिसे कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया और कहा जिलाधिकारी ने कोर्ट आदेश के खिलाफ अपील अधिकारी बन आदेश देकर कोर्ट की अवज्ञा की है। कोर्ट ने आश्चर्य प्रकट किया कि स्पष्ट आदेश के बावजूद जिलाधिकारी ऐसा आदेश दे रहा है। उसने कोर्ट की घोर अवहेलना की है।

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