Homeदिल्लीपतंगबाजी पर रोक लगाना न्यायोचित नहीं - दिल्ली हाईकोर्ट

पतंगबाजी पर रोक लगाना न्यायोचित नहीं – दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पतंगबाजी पर प्रतिबंध लगाने से साफ इंकार कर दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पतंगबाजी एक सांस्कृतिक परंपरा है और इस पर रोक लगाना न्यायोचित नहीं है। वहीं, सरकार और पुलिस प्रशासन को चाइनीज मांझे को लेकर एनजीटी के आदेश का पालन करना चाहिए।

चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए सख्त से सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद की पीठ ने कहा कि एनजीटी ने पहले ही चीनी सिंथेटिक ‘मांझा’ पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। न्यायाधीश ने दिल्ली पुलिस का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस मांझे की बिक्री रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है।

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इसके साथ ही उल्लंघन करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई भी कर रही है। दरअसल, हाईकोर्ट ने जनहित याचिका में पतंगों के उड़ने, बिक्री, खरीद, भंडारण और परिवहन पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। क्योंकि पतंगबाजी के कारण कई पक्षी और जानवर और इंसानों की जान चली गई है। या फिर पक्षी घायल हो जाते हैं।

बता दें कि वर्ष 2017 में नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने चाइनीज मांझे के भंडारण व बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने इसे लेकर अधिसूचना भी जारी की थी। ऐसे में सवाल यही उठता है कि आखिर क्षेत्र में चाइनीज मांझे की बिक्री और भंडारण पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है?

प्रतिबंध के पांच साल बाद अब भी यह कैसे लोगों को आसानी से मिल जाता है? कैसे प्रभावी बने प्रतिबंध? क्या इसके लिए बनाए गए नियम-कानून कमजोर हैं, जिसका लाभ उठाकर दुकानदार इसका भंडारण या बिक्री करते हैं? इस तरह के तमाम सवाल है जिनका जवाब खोजने की जरूरत है।

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