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बाबा साहब और ज्योतिबा फूले के ज़रिये दलितों को साधने में जुटी भाजपा

उत्तर प्रदेश समेत 4 राज्यों की सत्ता में हाल ही में वापसी करने वाली भाजपा की सफलता की वजह बड़े पैमाने पर दलित वर्ग के समर्थन को माना जा रहा था। अब भाजपा इसी रणनीति पर आगे बढ़ने की प्लानिंग है ताकि देश भर में वह दलित वर्ग के समर्थन वाली पार्टी बन सके। इसका संकेत पीएम नरेंद्र मोदी ने भाजपा के 42वें स्थापना दिवस के मौके पर दिया है। एक दशक पहले तक ही सवर्णों और उत्तर भारत की पार्टी कही जाने वाली भाजपा अब पुराने टैग से कहीं आगे बढ़ती दिख रही है। दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपना वैचारिक नेता मानने वाली भाजपा ने सामाजिक न्याय के प्रतीकों को भी तेजी से बीते कुछ सालों में अपनाया है।

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अब इस पर वह और आक्रामकता के साथ आगे बढ़ने वाली है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भाजपा के स्थापना दिवस के मौके पर कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अगले 15 दिनों तक देश भर में सामाजिक न्याय पखवाड़ा मनाएं। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में महात्मा ज्योतिबा फुले और बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती है। उनके स्मरण में हम सामाजिक न्याय पखवाड़ा मनाएंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस दौरान खुद को भी भाजपा का एक कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि हम अगले 15 दिन सामाजिक न्याय पखवाड़ा मनाने जा रहे हैं, इसके दौरान पार्टी मुझे भी जो आदेश देगी, वह काम मैं करूंगा।

5 राज्यों के चुनाव से पहले भाजपा की बड़ी प्लानिंग
पीएम मोदी के इस वक्तव्य से साफ है कि भाजपा की प्लानिंग क्या है। उत्तर प्रदेश में बसपा बेहद कमजोर हो गई है और कांग्रेस की भी स्थिति खराब होने के चलते देश भर में दलितों के वोटों पर भाजपा दावेदारी करती दिख रही है। इस साल के अंत में गुजरात, हिमाचल प्रदेश में चुनाव हैं और उसके बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इलेक्शन होने हैं। इन सभी 5 राज्यों में दलित जातियों की अच्छी खासी आबादी है। ऐसे में आंबेडकर और ज्योतिबा फुले की विरासत पर दावा कर भाजपा लंबे दौर की सियासत पर नजर रख रही है।

यूपी में लगातार 4 बार भाजपा को मिली बड़ी सफलता
बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एंट्री के बाद से ही अपनी पहचान पिछड़े और दलित वर्ग से जोड़ना शुरू कर दिया था। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर और ज्योतिबा फुले का जिक्र वह अकसर अपने भाषणों में करते रहे हैं। भाजपा की इस रणनीति का असर यूपी में 2014, 2017, 2019 और फिर 2022 के चुनाव में देखने को मिला है। इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी भाजपा को दलित वर्ग का अच्छा खासा समर्थन मिलता दिखा है।

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