Homeलाइफस्टाइलबच्चों को संभालने में न करें गलतियां

बच्चों को संभालने में न करें गलतियां

माता पिता के लिए बच्चों को संभालना एक जटिल काम होता है। बच्चों के साथ माता पिता का बर्ताव उन्हें सही या गलत इंसान बना सकता है। अभिभावक अगर बच्चे का सही मार्गदर्शन करते हैं तो उनका भविष्य संवर जाता है। लेकिन कई बार माता पिता का लाड प्यार बच्चे को बिगाड़ देता है। अक्सर माता पिता बच्चे के लालन पालन में कई ऐसी गलतियां कर जाते हैं, जो बच्चों को जिद्दी, गुस्सैल या शैतान बना देते हैं। इसके अलावा अभिभावकों की महत्वाकांक्षा और सपने बच्चों के मन मस्तिष्क पर दबाव डालते हैं, जिससे उनपर बोझ पड़ता है। ऐसे में माता पिता को बच्चों के पालन पोषण के दौरान कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए, ताकि आप एक आदर्श अभिभावक बन सकें और बच्चा एक बेहतरीन इंसान बने।

बच्चे की गलती छिपाना – कई बार माता या पिता बच्चे की किसी गलती पर उसे छुपा लेते हैं। बच्चे की गलतियों को नजरअंदाज कर जाते हैं। ऐसा करने से वह बच्चे को सही और गलत में फर्क महसूस नहीं करा पाते और बच्चा गलत व्यवहार करना सीख जाता है। नजरअंदाज करने के बजाए गलतियों पर बच्चे को समझाएं कि उसने गलत किया है।

दूसरे बच्चों के साथ तुलना – अक्सर अभिभावक बच्चों को प्रतियोगी बनाने के लिए उनकी तुलना दूसरे बच्चे से करते हैं। वह अपने किसी दोस्त, कॉलोनी के बच्चे की तुलना करते हुए अपने बच्चे को महसूस कराते हैं कि वह अभी बहुत पीछे हैं। लेकिन इससे बच्चे का मनोबल गिरता है। अपने बच्चे के गुणों की उपेक्षा और दूसरे बच्चों की तारीफ करना अभिभावकों की सबसे बड़ी गलती होती है।

बच्चों के लिए योजना बनाना – माता पिता अपने बच्चों से बहुत सारी महत्वाकांक्षा रखते हैं। अपने सपने को पूरा करने के लिए वह बच्चों के लिए योजनाएं बना लेते हैं। अभिभावक यह अपेक्षा करते हैं कि बच्चा उनके मनमुताबिक शिक्षा हासिल करें और उनके सपने को पूरा करने के लिए उस प्रोफेशन में जाए, जहां अभिभावक चाहते हैं लेकिन यह बच्चों के लिए तनाव की वजह बन जाता है। बच्चे के अपने खुद के विचार, पसंद और सपने होते हैं। ऐसे में बच्चे के लिए योजनाएं न बनाएं, बल्कि उसकी पसंद और हुनर के मुताबिक उसे अपनी योजनाएं बनाने की आजादी दें।

बच्चों के बर्ताव पर शर्मिंदा होना – अक्सर माता पिता बच्चे के किसी व्यवहार पर शर्म महसूस करते हैं। सबके सामने आपके बच्चे के किसी बर्ताव पर वह नाराजगी जाहिर करते हैं। जैसे अगर आपके बच्चे ने सबके सामने थोड़ी जिद कर दी या पेशाब कर दी, तो माता पिता शर्मिंदगी महसूस करते हुए बच्चे को डांटने लगते हैं। बच्चा इससे हीन भावना महसूस करता है। इसलिए बच्चे को प्यार से समझाएं। सबके सामने डांटें नहीं।

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