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    नौकरी और पैसों से जुड़ी समस्याओं की वजह से बनी रहती है अशांति तो करें ये उपाय

    कोरोना महामारी के बाद काफी लोगों के जीवन में ऐसे बदलाव आए हैं, जिनकी वजह से मन को शांति नहीं मिल पा रही है। घर-परिवार, नौकरी और पैसों से जुड़ी दिक्कतों की वजह से पूजा-पाठ करने के बाद भी अशांति बनी रहती है। उज्जैन के भागवत कथाकार पं. मनीष शर्मा के मुताबिक पूजा-पाठ के साथ ही ध्यान भी करेंगे तो मन को शांति जल्दी मिल सकती है। पूजा करते समय में अपने इष्टदेव के मंत्रों का जाप करते हुए ध्यान कर सकते हैं। अगर आप चाहें तो आंखें बंद करके दोनों भौंहों के बीच आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाकर जप कर सकते हैं।

    ध्यान और जप करने से बढ़ती है सकारात्मकता

    अगर कोई व्यक्ति रोज ध्यान और जप करता है तो उसे नकारात्मक विचारों से जल्दी मुक्ति मिल सकती है।
    नियमित रूप से मेडिटेशन करने से एकाग्रता बढ़ती है और हम किसी भी काम को मन लगाकर कर पाते हैं।
    अगर कोई ऐसी बात हो जाए जो हमें पसंद न हो तो हमें जल्दी गुस्सा नहीं आता है, लेकिन इसके लिए लंबे समय तक ध्यान का अभ्यास करना होता है।

    कैसी जगह पर पर करना चाहिए ध्यान

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    ध्यान करने के लिए किसी ऐसी जगह का चुनाव करें, जहां शांति और स्वच्छता हो।
    पूजा-पाठ करने के बाद आसन बिछाकर पर उस पर बैठ जाएं और रुद्राक्ष की माला की मदद से मंत्र जाप करें।
    अगर आप मंत्र जाप नहीं करना चाहते हैं तो सिर्फ ध्यान भी कर सकते हैं। मेडिटेशन करते समय मन में आने वाले विचारों को रोकना चाहिए।
    जब विचारों का प्रवाह रुक जाएगा, तब ही ध्यान का पूरा लाभ मिल पाएगा।
    तीर्थ यात्रा से भी मिलती है मन को शांति

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    दैनिक जीवन में बदलाव करके भी काफी हद को तनाव को कम किया जा सकता है। तीर्थ यात्रा करने से भी मन को सुकून मिलता है, नकारात्मकता खत्म होती है।

    अभी गर्मी का समय है तो इन दिनों ठंडी जगहों पर जैसे वैष्णो देवी, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र के मंदिर जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ, हेमुकंड साहिब, तुंगनाथ आदि जगहों की यात्रा की जा सकती है। यहां का प्राकृतिक वातावरण मन को शीतलता देता है और बुरे विचारों को दूर करता है।

    तीर्थ यात्रा पर नए-नए लोगों से मिलना होता है, नई बातें जानने को मिलती हैं, नए अनुभव मिलते हैं, जिनकी वजह से हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। एक जैसी जीवन शैली की वजह से भी तनाव बढ़ने लगता है, इसलिए समय-समय पर तीर्थ यात्रा करते रहना चाहिए।

     

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