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श्रीलंका में जनता के साथ पूर्व सैनिक मिलकर कर रहे है राष्ट्रपति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

कोलंबो, श्रीलंका में अभूतपूर्व आर्थिक संकट का दौर जारी है। इस बीच बुरे आर्थिक अर्थव्यवस्था से परेशान जनता ने राष्ट्रपति निवास को ही विरोध स्थल की जगह बना ली है। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ कोलंबो में चल रहे विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए पूर्व सैनिक भी पहुंच रहे हैं। प्रदर्शन में दर्जनों ऐसे सैनिक हिस्सा ले रहे हैं जो देश सेवा करते हुए दिव्यांग हो गए। दोनों हाथ-पैर खो चुके पूर्व विशेष बल सैनिक तुषारा कुमारा भी इस प्रदर्शन में मौजूद हैं। तुषार कुमारा ने कहा कि हमने इस देश को बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और देश की मौजूदा परिस्थिति से हम काफी दुखी हैं।

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देश को बचाने के लिए जमा हुए हैं प्रदर्शनकारी

पुराने साथियों के साथ प्रदर्शन कर रहे कुमारा ने आगे कहा कि मुझे इस देश के करदाताओं की वजह से पेंशन मिलती है, और अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम आगे बढ़कर देश को बचाएं। 16 सालों तक देश की सेवा कर चुके कुमारा ने कहा कि प्रदर्शनकारी, श्रीलंका को आर्थिक संकट से उभारने के लिए जमा हुए हैं। तीन बच्चों के पिता, कुमारा ने 26 सालों तक चले खूनी संघर्ष के दौरान अपना अंग खो दिया था।

कोविड-19 की वजह से श्रीलंका की बिगड़ गई अर्थव्यवस्था

बता दें श्रीलंका की बिगड़ी अर्थव्यवस्था के पीछे सराकर की गलत नीतियां जिम्मेदार है। इसी वजह से प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और उनके 76 वर्षीय बड़े भाई प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। कोविड-19 की वजह से पर्यटन के क्षेत्र में आई गिरावट और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता ने श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।

भारत सहित कई देश कर रहे हैं श्रीलंका की मदद

भारत सहित कई देश लगातार श्रीलंका को आर्थिक मदद दे रहे हैं। श्रीलंका के लिए तेजी से घटते विदेशी मुद्रा भंडार भी एक बड़ी परेशानी है। 2.19 करोड़ की जनसंख्या वाला देश ईंधन, भोजन और दवा के लिए जूझ रहा है। आलम यह है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कई हिंसक घटनाएं भी घट चुकी है। कुछ दिनों पहले श्रीलंका सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बातचीत की थी।

हर धर्म के लोग करे रहें हैं विरोध

कोलंबो में चल रहे प्रदर्शन में हर उम्र और धर्म के लोग हिस्सा ले रहे हैं। मुस्लिम समुदाय को लोग हों या बौद्ध धर्म के लोग सभी एक साथ राजपक्षे परिवार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं।

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