Homeलाइफस्टाइलइस योग से ऑस्टियोआर्थराइटिस की दिक्कत से पाए छुटकारा

इस योग से ऑस्टियोआर्थराइटिस की दिक्कत से पाए छुटकारा

लोगों में बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता और लाइफस्टाइल से संबंधित अन्य कई तरह की गड़बड़ आदतों ने जोड़ों में दर्द की समस्या को काफी बढ़ा दिया है। युवाओं में भी बढ़ती इस तरह की समस्या जीवन की गुणवत्ता को बिगाड़ सकती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस, ऐसे ही घुटनों में होने वाले दर्द की समस्या है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। हड्डियों के सिरों को सहायता देना वाली सुरक्षात्मक कार्टिलेज के खराब होने के कारण यह दिक्कत हो सकती है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस किसी भी जोड़ को नुकसान पहुंचा सकती है, यह विकार आपके हाथों, घुटनों, कूल्हों और रीढ़ में जोड़ों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। इस स्थिति में लोगों के लिए सामान्यरूप से चलना-उठना और दैनिका कामकाज तक कठिन हो जाता है।

जोड़ों में दर्द की इस तरह की समस्याओं के कम करने में योगासनों के अभ्यास से मदद ली जा सकती है। योग की मदद से शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने और हड्डियों-मांसपेशियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है। यदि आपको भी ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या है या फिर इस तरह की दिक्कतों से बचे रहना चाहते हैं तो नियमित रूप से दिनचर्या में योगासनों को जरूर शामिल करें। ऑस्टियोआर्थराइटिस के दर्द के प्रबंधन और इसे बढ़ने से रोकने में मदद करने में कुछ अभ्यास विशेष रूप से कारगर हो सकते हैं।

वीरभद्रासन योग का करिए अभ्यास
वीरभद्रासन योग, क्रोनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या में भी आपके लिए काफी सहायक अभ्यास माना जाता है। बाहों, पीठ के निचले हिस्से, घुटनों और पैरों को मजबूत तथा टोन करने में इस योग के लाभ हैं। यह उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो डेस्क पर काम करते हैं या शारीरिक रूप से कम सक्रिय रह पाते हैं। वीरभद्रासन योग का अभ्यास करके आर्थराइटिस की समस्या से बचा जा सकता है। यह अभ्यास शारीरिक सहनशक्ति और संतुलन में सुधार करने में भी आपके लिए विशेष लाभकारी है।

वृक्षासन योग से पा सकते हैं लाभ
वृक्षासन योग के अभ्यास की आदत मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द को ठीक करने में आपके लिए सहायक है। यह योगासन रक्त परिसंचरण को बढ़ाने, शारीरिक संतुलन में सुधार करने, शरीर के निचले हिस्से को मजबूत करने, एकाग्रता और फोकस बढ़ाने में आपके लिए काफी सहायक है। योग विशेषज्ञ बताते हैं, वृक्षासन योग का अभ्यास करने वाले लोगों में गठिया जैसी समस्याओं के विकसित होने का जोखिम अन्य लोगों से कम होता है। नियमित रूप से इस योगासन को करने से पैरों को भी मजबूती मिलती है।

सेतुबंधासन योग से पा सकते हैं लाभ
सेतुबंधासन योग जिसे ब्रिज पोज के तौर पर जाना जाता है, यह योग मुद्रा रक्त परिसंचरण में सुधार करने के साथ गर्दन, रीढ़, छाती और कूल्हों को फैलाने में मदद करती है। पीठ और कमर के दर्द को ठीक करने के लिए लंबे समय से इस योग के अभ्यास से लाभ प्राप्त किया जाता रहा है। ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी दर्द की समस्या से राहत दिलाने और जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में इस योग से विशेष रूप से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस वाले लोग आसानी से सेतुबंधासन योग को करके लाभ पा सकते हैं।

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