Homeलाइफस्टाइलप्रेग्नेंट होने के लिए कैसे की जाती है एग फ्रीजिंग?

प्रेग्नेंट होने के लिए कैसे की जाती है एग फ्रीजिंग?

बढ़ती प्रजनन समस्याओं (Fertility Problems) के कारण अधिकतर कपल्स को उम्र ज्यादा हो जाने पर गर्भधारण करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। प्रजनन क्षमता में उम्र की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में  देर से गर्भधारण करने वाली महिलाओं को सेहत से जुड़ी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि आज के समय में नई टेक्नॉलॉजी और इलाज के माध्यम से मां बनने की अनेक संभावनाएं उत्पन्न हो गई हैं। एग फ्रीजिंग नाम की टेक्नॉलॉजी ऐसी ही उन महिलाओं के लिए वरदान और एक उपयुक्त विकल्प बनकर सामने आई है, जो एक योजनाबद्ध तरीके से मां बनना चाहती हैं। यह प्रक्रिया तब सुर्खियों में आई, जब अनेक सेलिब्रिटीज, जैसे डायना हेडन, एकता कपूर, तनिशा मुखर्जी, और मोना सिंह आदि ने स्वस्थ बच्चे प्राप्त करने के लिए अंडे फ्रीज़ करवाने और योजनाबद्ध तरीके गर्भधारण करने का विकल्प चुना। बावजूद इसके किसी भी महिला को इस बारे में निर्णय लेने से पहले एग फ्रीजिंग से जुड़ी इन अहम बातों के बारे में जरूर पता कर लेना चाहिए। आइए जानते हैं डॉ. रचिता मुंजल, (कंसल्टेंट, बिरला फर्टिलिटी एवं आईवीएफ) से क्या है एग फ्रीजिंग और यह किस तरह की जाती है।

क्या है एग फ्रीजिंग?
एग फ्रीजिंग या अवसाईट्स क्रायोप्रिजर्वेशन एक ऐसी विधि है, जिसकी मदद से निकट भविष्य में महिला के गर्भधारण की क्षमता को संरक्षित किया जा सकता है। इस विधि में महिला की डिम्ब ग्रंथियों से अंडो को निकालकर उन्हें फ्रीज़ कर दिया जाता है, ताकि बाद में जब महिला को लगे कि वह गर्भधारण के लिए तैयार है, तब उन अंडों और शुक्राणु का निषेचन कराके महिला के गर्भ में स्थापित किया जा सके। पिछले कुछ समय में यह विधि उन महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुई है, जो चिकित्सा या सामाजिक कारणों से गर्भधारण को विलंबित करना चाहती हैं।

किस प्रकार की जाती है एग फ्रीजिंग?
एग फ्रीजिंग से पहले डिम्ब ग्रंथियों में अंडों के रिज़र्व और स्वास्थ्य समस्याओं की जांच के लिए महिलाओं का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण पूरा हो जाने के बाद, यह प्रक्रिया शुरू की जाती है, और हर कदम पर महिला की सावधानी से निगरानी की जाती है। एग फ्रीजिंग में अनेक प्रक्रियाएं शामिल हैं, लेकिन इसे तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है –

1.डिम्ब ग्रंथियों को उत्तेजित करना-
डिम्ब ग्रंथियों को उत्तेजित कर एक अंडे की जगह कई अंडों का उत्पादन करने के लिए महिला को हार्मोन दिए जाते हैं। अंडों को समय से पहले निकलने से रोकने के लिए अन्य दवाईयां दी जाती हैं। इसके अलावा, खून की जांच और वैजाइनल अल्ट्रासाउंड भी किए जाते हैं, ताकि प्रतिक्रिया और फॉलिकल्स (फ्लुड से भर सके, जहां अंडे परिपक्व होते हैं) की वृद्धि को देखा जा सके। डिम्ब ग्रंथियों में फॉलिकल्स के विकास में आमतौर से 9 से 14 दिनों का समय लगता है।

2.अंडे निकालना-
अंडे निकालने की इस प्रक्रिया में फॉलिकल्स की पहचान करने के लिए बेहोश करके योनि के अंदर एक अल्ट्रासाउंड प्रोब डाला जाता है। एक सुई से जुड़ी सक्शन डिवाइस द्वारा अनेक फॉलिकल्स को एस्पिरेट किया जाता है और परिपक्व अवसाईट (अंडों) की पहचान करने के लिए माईक्रोस्कोप द्वारा फॉलिकल फ्लुड की जांच की जाती है।

3-फ्रीज़िंग-
अनिषेचित अंडों को निकाला जाता है और उन्हें शून्य डिग्री फारेनहाइट (माईनस 18 डिग्री सेल्सियस) से कम तापमान पर फ्रीज़ कर दिया जाता है, ताकि वो भविष्य में उपयोग के लिए संरक्षित रहें। अंडे के जमने की सबसे आम प्रक्रियाओं में से एक को विट्रीफिकेशन कहा जाता है।

जब महिला फ्रीज़ किए गए अंडों का उपयोग करना चाहती है, तब उन्हें पिघलाया जाता है, और इंट्रा साइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) देकर निषेचित किया जाता है, और इस प्रकार विकसित भ्रूण को महिला के गर्भ में स्थापित कर दिया जाता है। इस विधि द्वारा गर्भधारण की क्या संभावना है, यह अंडों को फ्रीज किए जाने के वक्त महिला की उम्र पर निर्भर होता है, इसलिए अंडों को जितनी कम उम्र में फ्रीज़ कराया जाएगा, बाद में गर्भधारण की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

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एग फ्रीजिंग इन महिलाओं के लिए है बेस्ट ऑप्शन-
-एंडोमेट्रियोसिस, पीसीओडी, प्रीमैच्योर ओवेरियन इन्सफीसियंसी, या अन्य कोई स्थिति, जो डिम्ब ग्रंथियों( डिम्ब ग्रंथियां अंडे पैदा करने के साथ- साथ हार्मोन्स का भी उत्पादन करती हैं।) का खराब स्वास्थ्य और अंडों की खराब गुणवत्ता प्रदर्शित करे।
-वो महिलाएं, जो पेल्विक सर्जरी या ऐसा मेडिकल इलाज करा रही हों, जिससे ओवेरियन टिश्यू या अंडों को नुकसान हो सकता है। इनमें साध्य बीमारियों, जैसे ओवेरियन सिस्ट, एंडोमेट्रियोसिस और कैंसर से पीड़ित महिलाएं शामिल हैं।
-जिन महिलाओं को पारिवारिक इतिहास या जेनेटिक्स के कारण जल्दी मेनोपॉज़ होने की संभावना हो।
-जिन महिलाओं को कैंसर है और उन्हें कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी कराने का परामर्श दिया गया है। कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से पहले परामर्शित है कि भविष्य में प्रजनन क्षमता को बनाए रखने के लिए अंडों को फ्रीज़ करा लेना चाहिए।
-अंडों की फ्रीज़िंग उन महिलाओं के लिए भी उत्तम विकल्प है, जो अपने व्यक्तिगत कारणों, करियर या पढ़ाई के लिए गर्भधारण या शादी में देरी चाहती हैं।
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