Homeलाइफस्टाइलअगर आपके पेशाब का रंग बदल रहा है तो हो जाए सावधान

अगर आपके पेशाब का रंग बदल रहा है तो हो जाए सावधान

बॉडी में अनक्रोम पिग्मेंट होता है जिसके कारण पेशाब का रंग बनता है. यह पिग्मेंट जितना संकेंद्रित होता है पेशाब का रंग उतना ही गहरा होता है. आमतौर पर यूरिन का रंग हल्का पीला और हल्का मटमैला लेकिन पारदर्शी होता है लेकिन अगर शरीर में ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ पहुंचता है तो इससे यूरिन का रंग बदल जाता है. मायोक्लिनिकके मुताबिक अगर पेशाब का रंग असमान्य दिखे तो यह खतरे का संकेत हो सकता है.

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इन स्थितियों में खतरा

डार्क और ओरेंज कलर-अगर पेशाब का रंग अधिक गहरा या नारंगी कलर का है तो भी यह बीमारी के संकेत हैं. खास कर तब जब स्टूल का रंग भी बदला हुआ है. इस स्थिति में लिवर की गंभीर समस्या हो सकती है.

रेड कलर-अगर पेशाब का रंग लाल हो जाए तो यह गंभीर समस्या हो सकती है. यह किडनी में स्टोन और मूत्राशय में इंफेक्शन की वजह से हो सकता है. अगर पेशाब करते वक्त दर्द नहीं हो रहा है और पेशाब का रंग लाल है तो यह और चिंता का विषय है. ऐसी स्थिति में कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है.

ऐसे पता करें
सामान्यतया यूरिन का रंग शरीर को प्राप्त तरल पदार्थों पर निर्भर करता है. तरल पदार्थ शरीर में जितना जाएगा वह यूरिन में यैलो पिग्मेंट को उतना ही पतला कर देगा. अगर आप अधिक पानी पीएंगे तो यूरिन का रंग उतना ही ज्यादा साफ होगा. जब कम पानी पीया जाए तो यूरिन का रंग यैलो के साथ-साथ गाढ़ा होता जाएगा. इसलिए यूरिन का रंग खाने-पीने पर निर्भर करता है. चुकंदर, जामुन या कुछ दवाओं के सेवन की स्थिति में यूरिन का कलर हरा, पीला, नीला आदि हो सकता है. इसलिए ऐसा नहीं है कि यूरिन का रंग बदलने पर हर बार किसी बीमारी का ही खतरा हो. हां अगर बिना कुछ खाए-पीए पेशाब का रंग असामान्य तरीके से बदलता है तो यह किसी बीमारी के संकेत हो सकते हैं.

अगर यूरेनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन हो जाए या किडनी में स्टोन हो जाए तो यूरिन का रंग ब्लड के रंग का दिखने लगेगा. सामान्यतया इसमें यूरिन पास करते समय दर्द भी होगा, लेकिन अगर दर्द नहीं हो रहा है और यूरिन का कलर ब्लडिश है, तो यह खतरे का संकेत है. कभी-कभी यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरियल इंफेक्शन होने से यूरिन का रंग नीला भी हो सकता है. यह हाइपरकैल्सीमिया या ब्लू डायपर सिंड्रोम का संकेत हो सकता है. अगर यूरिन का कलर डार्क या ऑरेंज कलर का हो जाए, तो भी यह खतरे की घंटी है. इन स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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