Homeमध्य प्रदेशस्वस्थ रहना है तो करें फाइबर युक्‍त भोजन, जाने फायदे

स्वस्थ रहना है तो करें फाइबर युक्‍त भोजन, जाने फायदे

इंदौर, आजकल जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें मधुमेह, हृदय रोग, फैटी लीवर, मोटापा, थायराइड, रक्तचाप आदि शामिल हैं। अगर जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर नियंत्रण करना है तो उसके लिए हमें नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, सेवन करना होगा। पोषक तत्वों की और दिनचर्या में सुधार। समय की कमी या अन्य कारणों से बहुत से लोग नियमित रूप से व्यायाम नहीं कर पाते हैं, लेकिन खान-पान पर ध्यान देकर स्वास्थ्य रहा जा सकता है।

रेशेदार भोजन अपनाना बेहद जरूरी

डायटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट वृंदा खांडवे के मुताबिक स्वस्थ रहने के लिए रेशेदार भोजन को अपनाना बेहद जरूरी है। फाइबर युक्त भोजन रंगहीन, स्वादहीन और गंधहीन होता है। यह उचित पाचन को बनाए रखने में मदद करता है। यह विषाक्त पदार्थों को बेअसर करता है और उनके उत्सर्जन में मदद करता है। यह शरीर को डिटॉक्सीफाई करता है। यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी मददगार होता है। रक्त में शर्करा की गति धीमी होने के कारण यह मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। यह भोजन के पाचन में मदद करता है। फाइबर मल को इकट्ठा करने और बाहर निकालने में मदद करके कब्ज से दूर रखता है। यह पानी को सोख लेता है और मल को मुलायम बनाता है।

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दिल की सेहत के लिए भी अच्छा

फाइबर पाचन क्रिया को नियमित करता है जिससे शरीर में शुगर की मात्रा अचानक ना बढ़े। इसके सेवन से पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे भोजन पर काबू रहता है। इससे वजन भी नहीं बढ़ता है। यह दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा होता है। यह एसिडिटी को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। प्रत्येक 1000 कैलोरी वाले भोजन में 14 ग्राम फाइबर होना चाहिए। छिलके वाली मसूर की दाल, साबुत अनाज, चौकर सहित आटा, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, अंकुरित अनाज, सलाद, सूखे मेवे में फाइबर पाया जाता है।

अमरूद, मटर, नाशपाती, सेब, केला, रसीले फल फाइबर से भरपूर होते हैं। खाने की थाली में फाइबर की मात्रा कुल भोजन का कम से कम 25 प्रतिशत होनी चाहिए। दैनिक आहार में फाइबर की कमी होती है, इसलिए पूरक के रूप में फाइबर की पूर्ति कर करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

अमरूद, मटर, नाशपाती, सेब, केला, रसीले फल फाइबर से भरपूर होते हैं। खाने की थाली में फाइबर की मात्रा कुल भोजन का कम से कम 25 प्रतिशत होनी चाहिए। दैनिक आहार में फाइबर की कमी होती है, इसलिए पूरक के रूप में फाइबर की पूर्ति कर करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

 

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