Homeबिज़नेसउद्योगपति अदाणी ग्लोबल लीडरशिप अवॉर्ड से सम्मानित किये गए

उद्योगपति अदाणी ग्लोबल लीडरशिप अवॉर्ड से सम्मानित किये गए

अदाणी समूह के संस्थापक व दुनिया के तीसरे नंबर के धनी गौतम अदाणी को यूएसआईबीसी 2022 ग्लोबल लीडरशिप अवॉर्ड से नवाजा गया है। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स की यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल  (USIBC) की ओर से यह पुरस्कार अदाणी समूह के मुखिया को उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए प्रदान किया गया है।

काउंसिल ने इस मौके पर ‘मैक्सिमाइजिंग द नेक्स्ट 75 इयर्स ऑफ यूएस-इंडिया प्रॉस्पेरिटी‘ थीम पर संवाद कार्यक्रम रखा। इसे संबोधित करते हुए अदाणी ने भारत अमेरिका के बीच व्यावसायिक रिश्तों व भावी संभावनाओं को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी।

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कार्यक्रम में यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रमुख मायरोन ब्रिलियंट, यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष, राजदूत अतुल केशप समेत कई उद्योगपति व विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। अपने संबोधन में अदाणी ने कहा, ‘यूएसआईबीसी ग्लोबल लीडरशिप अवॉर्ड प्राप्त करना सम्मान की बात है। मैं आभारी हूं कि मुझे इतने सारे इंडस्ट्री लीडर्स और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में मुझे बोलने का अवसर मिला। यह पुरस्कार भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर मिला है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण और यादगार बना देता है।’

अदाणी ने कहा कि इस बात पर कोई असहमति नहीं हो सकती है कि भारत और अमेरिका जैसे दो सबसे बड़े वैश्विक लोकतंत्रों के बीच तेजी से विकसित और नई उभरती वैश्विक गतिशीलता, साझेदारी की सफलता इस सदी के सबसे परिभाषित संबंधों में से एक होगी। हालांकि, रणनीतिक दृष्टि से मुझे यकीन है कि हम सभी इस बात से सहमत होंगे कि जमीनी स्तर पर काम किए जाने के मामले में अभी और अधिक किए जाने की जरूरत है। इसके लिए पारस्परिक स्वीकृति की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि इसमें मुक्त व्यापार, खुलापन और एक दूसरे की अर्थव्यवस्था का एकीकरण शामिल है।

गौतम अदाणी ने कहा है कि भू-राजनीतिक सरोकारों पर साझा राय जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ तब तक बहुत कम होगा जब तक कि वे व्यावसायिक संबंधों की नींव पर न बने हों। स्पष्ट व्यावसायिक उद्देश्यों के बिना वैश्विक सहयोग काफी हद तक पंगु बना रहेगा। इस संदर्भ में यूएसआईबीसी की भूमिका उद्योग की आवाज और सरकारी नीतियों के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण होगी। वर्तमान विश्व व्यवस्था को देखते हुए उन्होंने कहा कि आवश्यकताएं बहुत अधिक हैं औरं और चीजें बड़े पैमाने पर कसौटी पर हैं।

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