Homeउत्तर प्रदेशदिसंबर 2024 तक इसरो लांच कर सकता है अपना वीनस मिशन

दिसंबर 2024 तक इसरो लांच कर सकता है अपना वीनस मिशन

नई दिल्ली : चंद्रयान और मंगलयान की सफलता के बाद भारत अब धरती की छोटी बहन कहे जाने वाले शुक्र ग्रह के लिए ‘शुक्रयान’ मिशन पर काम कर रहा है। इसे दिसंबर 2024 तक लॉन्च किया जा सकता है। इसके साथ ही भारत अमेरिका, रूस, जापान समेत उन चुनिंदा देशों में शामिल होने की रेस में शामिल हो गया है जिन्होंने धरती के सबसे करीबी ग्रह शुक्र यानी वीनस तक अंतरिक्षयान भेज चुके हैं। शुक्रयान शुक्र ग्रह के वातावरण का अध्ययन करेगा जो जीवन के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। जो सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों से घिरा हुआ है। भारत के शुक्रयान मिशन के बारे में डीटेल से पहले आपको बताते हैं कि आखिर वीनस यानी शुक्र ग्रह क्यों इतना महत्वपूर्ण है जो तमाम देश उसका अध्ययन कर रहे हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है शुक्र ग्रह
शुक्र ग्रह धरती का सबसे नजदीकी ग्रह है। उसे सोलर सिस्टम का पहला ग्रह माना जाता है जहां जीवन था। कभी वह बिल्कुल धरती की तरह था। आकार में भी पृथ्वी जैसा ही। धरती की तरह वहां भी महासागर था। वहां की जलवायु भी धरती की तरह थी। लेकिन अब शुक्र ग्रह जीवन के लायक नहीं है। वहां सतह का तापमान 900 डिग्री फारेनहाइट यानी 475 डिग्री सेल्सियस है। ये तापमान इतना ज्यादा है कि शीशे तक को पिघला सके। वीनस का वातावरण बहुत जहरीला है। वह कॉर्बनडाई ऑक्साइड से भरा पड़ा है। शुक्र ग्रह सल्फ्यूरिक एसिड के पीले बादलों से घिरा हुआ है। शुक्र के वातावरण का घनत्व पृथ्वी के मुकाबले 50 गुना ज्यादा है। ये सोलर सिस्टम का सबसे गर्म ग्रह है। कभी सोलर सिस्टम का पहला जीवन वाला ग्रह रहा शुक्र आज नरक की तरह क्यों है? ये क्यों और कैसे हुआ? कहीं धरती की भी वही स्थिति तो नहीं हो जाएगी? दुनियाभर के वैज्ञानिक इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। वीनस के अध्ययन से धरती पर भी जीवन के संभावित विनाश को टाला जा सकता है।

भारत का मिशन ‘शुक्रयान’
इसरो चेयरमैन एस. सोमनाथ ने बुधवार को कहा कि वीनस मिशन पर कई सालों से काम चल रहा था और अब स्पेस एजेंसी ‘शुक्र तक ऑर्बिटर भेजने के लिए तैयार’ है। उन्होंने कहा, ‘प्रोजेक्ट रिपोर्ट बन चुकी है, सारे प्लान तैयार हैं, लागत की तैयारी हो चुकी है। भारत के लिए शुक्र की कक्षा में मिशन भेजना बहुत कम समय में मुमकिन है क्योंकि हमारे पास आज यह क्षमता है।’ भारत के वीनस मिशन को औपचारिक तौर पर ‘शुक्रयान’ मिशन नाम नहीं दिया गया है लेकिन जिस तरह मून मिशन को चंद्रयान, मार्स मिशन को मंगलयान नाम दिया गया, उसी तरह इसरो के वीनस मिशन को शुक्रयान नाम दिया जा सकता है।

दिसंबर 2024 तक लॉन्च का लक्ष्य
भारत दिसंबर 2024 तक शुक्र मिशन को लॉन्च करना चाहता है। इसकी वजह ये है कि उस वक्त पृथ्वी और शुक्र ग्रह की स्थिति ऐसी रहेगी कि किसी स्पेसक्राफ्ट को वीनस तक पहुंचने में कम से कम ईंधन लगे। अगर दिसंबर 2024 में लॉन्चिंग नहीं हो पाती है तो फिर उसके 7 साल बाद यानी 2031 में उस तरह की अनुकूल खगोलीय स्थिति बन पाएगी। हालांकि, इसरो ने अभी आधिकारिक तौर पर वीनस मिशन के लिए कोई टाइमलाइन जारी नहीं किया है।

वीनस मिशन से क्या जानकारियां जुटाई जाएंगी
वीनस मिशन के लिए जिन एक्सपेरिमेंट्स की योजना बनाई गई है उनमें सतह की जांच करना, सतह के निचले भाग की परतों की जांच करना, शुक्र ग्रह पर कहां-कहां ज्वालामुखी सक्रिय हैं, किस तरह लावा बह रहे हैं, वातावरण किन-किन चीजों से बना है यानी एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री आदि का अध्ययन करना शामिल है। इसके अलावा सौर हवाओं का शुक्र के आयनमंडल यानी आयनोस्फेयर पर क्या असर पड़ता है, इसकी जांच की जाएगी।

शुक्रयान के महत्वपूर्ण उपकरण
शुक्रयान का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण उसका डुअल फ्रिक्वंसी सिंथेटिक अपर्चर रेडार है जिसे इसरो ने चंद्रयान-2 मिशन के लिए तैयार किया गया है। ये रेडार अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA की तरफ से 1989 में लॉन्च किए गए मैगलन ऑर्बिटर मिशन के रेडार से 4 गुना ज्यादा रेजोलूशन है। शुक्रयान के लिए GSLV Mk II या फिर उससे भी ताकतवर GSLV Mk III लॉन्च वीइकल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अबतक 46 वीनस मिशन लॉन्च हो चुके हैं
अबतक अमेरिका, रूस, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और जापान ही वीनस मिशन लॉन्च किए हैं। अबतक कुल 46 वीनस मिशन लॉन्च हुए हैं। इनमें से कुछ स्पेसक्राफ्ट वीनस के पास पहुंचे, कुछ उसकी कक्षा में पहुंचे तो कुछ की सतह पर हार्ड लैंडिंग हुई तो कुछ की सॉफ्ट लैंडिंग। इन मिशनों को 3 तरह से बांटा जा सकता है-

  •  फ्लाइबाई यानी प्लेनेट के नजदीक से स्पेसक्राफ्ट गुजरता है
  • लैंडर मिशन यानी जिसमें स्पेसक्राफ्ट से उपकरण को ग्रह की सतह पर लैंड कराया जाता है
  • ऑर्बिटर मिशन यानी जिसमें संबंधित ग्रह के ऑर्बिट यानी कक्षा में स्पेसक्राफ्ट चक्कर लगाता रहता है
  • भारत का वीनस मिशन ऑर्बिटर होगा।

1962 में सबसे पहले अमेरिका को मिली वीनस मिशन में कामयाबी
सबसे पहले फरवरी 1961 में रूस ने शुक्र के लिए टी. स्पूतनिक मिशन को लॉन्च किया था लेकिन वह नाकाम हो गया। अमेरिका ने भी जुलाई 1962 को मैरिनर-1 के जरिए पहली बार फ्लाईबाई वीनस मिशन को लॉन्च किया लेकिन नाकाम रहा। उसी साल अगस्त 1962 में अमेरिका वीनस मिशन में आकिरकार कामयाब हुआ। उसका मैरिनर-2 मिशन कामयाब रहा। उसके 5 साल बाद रूस को पहली बार वेनेरा-4 के जरिए वीनस मिशन में कामयाबी मिली। 2005 में यूरोपीय स्पेस एजेंसी का वीनस एक्सप्रेस मिशन भी कामयाब हुआ। 2010 में सफल वीनस मिशन वाले चुनिंदा देशों के क्लब में जापान भी शामिल हो गया जब उसका मिशन अकात्सुकी कामयाब हुआ। ये मिशन अब भी काम कर रहा है। पिछले 30 सालों में सिर्फ 3 स्पेसक्राफ्ट ही वीनस की कक्षा में स्थापित हो पाए हैं।

अभी ये वीनस मिशन ऐक्टिव
जापान का अकात्सुकी मिशन अभी भी ऐक्टिव है। ये एक ऑर्बिटर मिशन है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी बेपी कोलंबो का स्पेसक्राफ्ट मरकरी की तरफ बढ़ रहा है लेकिन मिशन के दौरान ये दो बार वीनस के बहुत पास से गुजरेगा।

इन वीनस मिशनों की चल रही तैयारी
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA 2028 में अपने स्पेसक्राफ्ट VERITAS को लॉन्च करेगी जो शुक्र ग्रह का अध्ययन करेगी। इसके अलावा NASA एक और मिशन DAVINCI लॉन्च करने की तैयारी में है। भारत दिसंबर 2024 में पहला वीनस मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसी तरह यूरोपियन स्पेस एजेंसी भी EnVision स्पेसक्राफ्ट को 2030 तक लॉन्च करने वाला है। रूस भी आने वाले समय में अपने लैंडर मिशन वेनेरा-डी को लॉन्च करने की तैयारी में है।

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