Homeउत्तराखंडकरन माहरा राजपूत को मिली उत्तराखंड कांग्रेस की कमान

करन माहरा राजपूत को मिली उत्तराखंड कांग्रेस की कमान

देहरादून : कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष, नेता विधायक दल (नेता प्रतिपक्ष) और उप नेता विधायक दल के चयन में जातीय व गुटीय संतुलन साधने का प्रयास किया। यद्यपि, इन सबके बीच वह क्षेत्रीय संतुलन साधने में चूक गई। कारण यह कि पार्टी के ये तीनों अहम पद कुमाऊं मंडल के खाते में चले गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कार्यकारी अध्यक्ष समेत अन्य पदों पर गढ़वाल को प्रतिनिधित्व देकर संतुलन साधने का प्रयास किया जा सकता है।

करण माहरा मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी
कांग्रेस ने आखिरकार लगभग एक महीने के इंतजार के बाद संगठन व विधानसभा के भीतर पार्टी का झंडा बुलंद करने वालों के नाम घोषित कर दिए। प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए करन माहरा राजपूत हैं और अल्मोड़ा जिले की रानीखेत सीट से दो बार विधायक रहे हैं। इस चुनाव में वह पराजित हो गए थे। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का करीबी माना जाता रहा है।

नेता प्रतिपक्ष का जिम्मा कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री यशपाल आर्य को सौंपा गया है। आर्य ऊधमसिंह नगर जिले की अनुसूचित जाति आरक्षित बाजपुर सीट से विधायक हैं। वह पूर्व में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

इनके अलावा उपनेता प्रतिपक्ष भुवन चंद्र कापड़ी खटीमा से पहली बार विधायक बने हैं। कापड़ी ब्राह्मण हैं और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के नजदीकी बताए जाते हैं। इस तरह से पार्टी ने जातीय व गुटीय संतुलन को साधने का प्रयास किया है।

इस सबके बीच पार्टी में क्षेत्रीय संतुलन साधने में कहीं न कहीं चूक भी नजर आ रही है। राज्य में वर्ष 2014 से अब तक के लोकसभा व विधानसभा चुनावों में पार्टी को लगातार पराजय का सामना करना पड़ा है। अब उसके सामने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में स्वयं को साबित करने की चुनौती है। ऐसे में पार्टी में क्षेत्रीय असंतुलन उसके लिए कठिनाई पैदा कर सकता है।

कारण यह कि नए नेतृत्व के साथ लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जनता के बीच जाएगी। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में पार्टी कुमाऊ मंडल में अधिक संभावनाएं देख रही है। यहां से पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 11 सीटों से जीत दर्ज की है। यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र से बनाए गए हैं तो नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष नैनीताल लोकसभा क्षेत्र से।

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हालांकि, इससे गढ़वाल मंडल की तीन सीटों पर प्रभाव पडऩे से इन्कार नहीं किया जा सकता। कारण, यहां से अभी तक किसी को संगठन में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। गढ़वाल मंडल से पार्टी को विधानसभा चुनाव में आठ सीटें मिली थी।

इनमें पांच सीटें हरिद्वार और तीन सीटें गढ़वाल मंडल के पर्वतीय जिलों की हैं। माना जा रहा है कि पार्टी निकट भविष्य में गढ़वाल मंडल से कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष समेत अन्य अहम पदों पर पार्टी नेताओं को जिम्मेदारी देकर क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास करेगी।

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