Homeलाइफस्टाइलजानिये क्यों होता है पोस्ट ट्रमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर?

जानिये क्यों होता है पोस्ट ट्रमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर?

किसी प्रिय व्‍यक्ति की मौत, अपराध, किसी से बिछड़ना या दुर्घटना को भुला पाना आसान नहीं होता. कुछ लोग इन घटनाओं को भुलाकर आगे बढ़ जाते हैं वहीं कुछ पुरानी यादों और विचारों में खोए रहते हैं. जो लोग अप्रिय घटनाओं को समय के साथ भुला नहीं पाते वे आसानी से पोस्‍ट ट्रमैटिक स्‍ट्रेस डिसऑर्डर का शिकार हो जाते हैं.

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पोस्‍ट ट्रमैटिक स्‍ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षण

– बुरे सपने आना

– फ्लैशबैक में जीना

– डरावने विचार

– सोने में कठिनाई

– गुस्‍सा या चिड़चिड़ापन

– तनाव और बेचैनी महसूस करना

– दूसरों से दूरी बनाना

– डिप्रेशन

– मानसिक परेशानी

– एकाग्रता की कमी

– सिर दर्द

– चेस्‍ट पेन

– अधिक पसीना आना

चलिए जानते हैं पोस्‍ट ट्रमैटिक स्‍ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षण और इलाज के बारे में-

एक्‍सपेरिमेंटल थेरेपी– इस थेरेपी का प्रयोग तब किया जाता है जब व्‍यक्ति इस थेरेपी को सहने की क्षमता रखता हो. कई बार इमोशनल वीक होने की वजह से ये थेरेपी करना मुश्किल हो जाता है. इस थेरेपी के माध्‍यम से घटना को पूरी तरह से व्‍यक्ति के सा‍मने रि-क्रिएट किया जाता है. इससे पेशेंट को घटना के बारे में बात करने की हिम्‍मत मिलती है.

एक्‍सपोजर थेरेपी– किसी घटना के बारे में बार-बार बात करने और उसे याद दिलाने से व्‍यक्ति उनके बारे में सोचना कम कर देता है. ये थेरेपी पेशेंट के विचारों और भावनाओं को कंट्रोल करने में मदद करती है. इस थेरेपी का प्रयोग काफी सावधानी से किया जाना चाहिए वरना लक्षण और अधिक बिगड़ सकते हैं.

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