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    पाकिस्तान की तरह श्रीलंका में भी हो सकता है तख्तापलट

    इस वक्त पूरी दुनिया की राजनीतिक स्थितियां थोड़ा बदली हुई हैं। रूस और यूक्रेन का युद्ध अभी तक थमा नहीं है। भारत के पड़ोसी मुल्क भी राजनीतिक उठापठक का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान में इमरान सरकार के खिलाफ आखिरकार अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया। इसके साथ ही इमरान खान सत्ता से बेदखल कर दिए गए। वहीं श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण वहां की जनता सड़कों पर है। विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है और लोगों को खाने के लाले पड़ रहे हैं। लेकिन श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे अभी भी कुर्सी पर जमे हुए हैं। अब पाकिस्तान की ही तर्ज पर श्रीलंका में भी तख्तापलट देखने को मिल सकता है। वहां के मुख्य विपक्षी दल ने राजपक्षे को इसके इशारे दे दिए है।

    विपक्ष ने दिया अल्टीमेटम
    श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल ने सरकार से कहा कि वह इस आर्थिक संकट का जल्द समाधान करे, नहीं तो अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार रहे। मुख्य विपक्षी दल एसजेबी के नेता सनथ प्रेमदासा का कहना है कि सरकार को कर्ज से मुक्ति के लिए काम करना चाहिए। एसजेपी ने सांसदों से अविश्वास प्रस्ताव के लिए हस्ताक्षर लेना शुरू कर दिया है। विपक्षी जेवीपी ने भी कहा है कि अगर गोटाबया राजपक्षे इस्तीफा नहीं देते हैं तो उन्हें अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा। आर्थिक संकट को देखते हुए श्रीलंका में लोग सड़कों पर अपनी नाराजगी का इजहार कर रहे हैं।

    पाकिस्तान जैसी हो गई है हालत
    पाकिस्तान में आज तक कोई भी सरकार अपना पूरा कार्यकाल नहीं चला पाई। इमरान खान भी तीन साल सात महीने ही अपनी सरकार चला पाए। इमरान खान ने कई पैंतरे अपनाए ताकि फ्लोर टेस्ट से बच सकें लेकिन उनके सारे पैंतरे विपक्ष के आगे फेल हो गए। इमरान खान ने अपनी सरकार पहले तो संविधान का हवाला देते हुए बचा ली। संसद ने विपक्ष की मांग खारिज कर दी थी मगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार रात इमरान सरकार गिर गई। अब ऐसी ही स्थितियां श्रीलंका की भी होती जा रही है। बेशुमार महंगाई ने आम आदमी को तोड़ कर रख दिया है। लोग सड़कों पर हैं, पूरे देश में आपातकाल घोषित करना पड़ा। अब वहां भी विपक्ष सरकार के खिलाफ मोर्चे की तैयारी कर रहा है।

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    कर्ज लेने की तैयारी में श्रीलंका
    गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा श्रीलंका नए कर्ज लेने की तैयारी में है। उसने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के साथ वर्ल्ड बैंक से भी कर्ज लेने की तैयारी कर ली है। इन सब मामलों में समन्वय के लिए वित्तीय विशेषज्ञों की 3 मेंबर वाली सलाहकार समिति बनाई गई है। इस समिति में सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका के पूर्व गवर्नर इंद्रजीत कुमारस्वामी को शामिल किया गया है। इसमें शांता देवराजन और शर्मिनी कुर्रे भी हैं। कमेटी से कर्ज संकट को दूर करने के उपाय सुझाने को भी कहा गया है। साथ ही देश में मौजूदा हालात से निपटने के लिए उपाय बनाने को कहा गया है। इस बीच एशियाई डेवलपमेंट बैंक ने 2022 में श्रीलंका की आर्थिक वृद्धि में 2.5% के मामूली सुधार का अनुमान जताया है।

    श्रीलंका से आपातकाल हटाया गया
    श्रीलंका में बिगड़ते हालात के बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने 6 अप्रैल आधी रात को इमरजेंसी हटाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने 5 दिन पहले ही देश में इमरजेंसी लगा दी थी। इसके बाद से ही उन्हें भारी विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है। लोग राष्ट्रपति से इस्तीफा मांग रहे हैं, लेकिन उनकी सरकार ने राष्ट्रपति गोटबाया के इस्तीफे से इनकार किया है। राजपक्षे सरकार में हाइवे मंत्री जॉनसन फर्नांडो ने संसद को बताया कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे किसी भी हाल में इस्तीफा नहीं देंगे। आपको याद दिला दूं कि 69 लाख लोगों ने राष्ट्रपति के लिए मतदान किया था। एक सरकार के रूप में, हम स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि हम इसका (विरोध प्रदर्शनों का) सामना करेंगे।

    2019 से सत्ता में है राजपक्षे
    राजपक्षे परिवार के अहम सदस्यों के साथ 2019 से इस द्वीप देश की सत्ता में हैं। मंगलवार को उनकी सरकार से 42 सांसदों ने समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद से राष्ट्रपति राजपक्षे की सरकार अल्पमत में आ गई और उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने लगी। श्रीलंका के वरिष्ठ वामपंथी नेता वासुदेव ननायक्कारा ने बुधवार को कहा कि देश में पैदा हुई राजनीतिक उथल पुथल को मध्यावधि चुनाव कराकर खत्म किया जाना चाहिए। चुनाव कराने से पहले कम से कम छह महीने के लिए समावेशी सरकार का गठन किया जाना चाहिए। ‘डेमोक्रेटिक लेफ्ट फ्रंट’ के नेता ननायक्कारा उन 42 सांसदों में हैं, जिन्होंने सतारूढ़ श्रीलंका पोदुजन पेरामुन (एसएलपीपी) गठबंधन से खुद को अलग करने की घोषणा की है।

    लोग कर रहे हैं प्रदर्शन
    बीते मंगलवार शाम को हजारों स्टूडेंट्स ने कोलंबो में भारी बारिश के बीच राष्ट्रपति के भाई और देश के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के घर तक मार्च निकाला था। लगातार गहराते आर्थिक संकट के बीच देशभर में चीन के खिलाफ लोगों को गुस्सा बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार के पास पैसा नहीं है, क्योंकि उसने चीन को सब कुछ बेच दिया है। चीन दूसरे देशों को उधार देकर उनका सब कुछ खरीद ले रहा है। कर्ज में डूबा लंका विदेशी मुद्रा की कमी के कारण जरूरी चीजों का आयात नहीं कर पा रहा है। आम लोग तेल, बिजली, खाना, दवाओं और अन्य जरूरी चीजों के संकट का सामना कर रहे हैं।

    सरकार का दावा, हिंसा के पीछे विपक्षी दल JVP
    श्रीलंका सरकार का आरोप है कि देश में हिंसक प्रदर्शनों के पीछे विपक्षी दल जनता विमुक्ति पेरमुनावस (JVP) का हाथ है। राजपक्षे सरकार में हाइवे मंत्री जॉनसन फर्नांडो ने कहा कि इस तरह की ठग राजनीति की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से कहा कि हिंसा खत्म करें। सरकार उनकी समस्याएं हल करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने इमरजेंसी लागू करने का भी बचाव किया और कहा कि राष्ट्रपति के दफ्तर और अन्य सरकारी संपत्तियों पर हमले के बाद ही इसे लगाया गया था।

    संसद के स्पीकर ने चेताया, भुखमरी का है खतरा
    श्रीलंकाई संसद के स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धन ने बुधवार को चेताया कि देश की 2.2 करोड़ की आबादी इस गंभीर संकट के चलते भुखमरी के कगार पर पहुंच गई है। पूर्व क्रिकेटर अर्जुन रणातुंगा ने कहा कि सरकार देश को ठीक से नहीं चला सकती है। राष्ट्रपति को इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि वह नाकाम रहे हैं। यह मुद्दा अब आम आदमी का है। मुझे उम्मीद है कि इससे देश में रक्तपात नहीं होगा।

    अस्पतालों में दवाओं के लिए लंबी कतारें
    श्रीलंका में दवाओं की कमी के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराने लगी हैं। अस्पतालों में दवाओं के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई जरूरी दवाएं आउट ऑफ स्टॉक हो गई हैं। इस स्थिति के विरोध में बुधवार को 200 डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ मार्च निकाला है। श्रीलंका में ज्यादातर दवाएं भारत से पहुंच रही हैं। इसके लिए वहां के नैशनल आई हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. दममिका ने शुक्रिया अदा किया है। हालांकि पिछले महीने हुए समझौते की दवाएं अब तक नहीं पहुंची हैं। इस बारे में न तो श्रीलंका और न ही भारत के अधिकारियों ने कोई जवाब दिया है।

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