Homeदेशजलवायु परिवर्तन के कारण करोड़ो लोगों पर पड़ेगा प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण करोड़ो लोगों पर पड़ेगा प्रभाव

नई दिल्‍ली, धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है। बड़े स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम किए बिना इसी सदी के अंत तक ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस की तय सीमा पर रोक पाना कठिन ही नहीं असंभव माना जा रहा है। पूरे विश्व में इसके लिए मंथन और प्रयास चल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के अनुसार धरती की रक्षा के लिए निवेश केवल सरकारों के स्तर पर ही नहीं होना चाहिए, बल्कि निजी क्षेत्र को भी इसमें सहभागिता करनी होगी। भारत भी धरा को बचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास कर रहा है।

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नई दिल्‍ली, धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है। बड़े स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम किए बिना इसी सदी के अंत तक ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस की तय सीमा पर रोक पाना कठिन ही नहीं असंभव माना जा रहा है। पूरे विश्व में इसके लिए मंथन और प्रयास चल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के अनुसार धरती की रक्षा के लिए निवेश केवल सरकारों के स्तर पर ही नहीं होना चाहिए, बल्कि निजी क्षेत्र को भी इसमें सहभागिता करनी होगी। भारत भी धरा को बचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास कर रहा है।

भारतीय रेल के बड़े हिस्से का विद्युतीकरण कर दिया गया है। इससे जीवाश्म ईंधन से प्रयोग में कमी आई है। देश के 50 से अधिक हवाई अड्डों पर सौर ऊर्जा का प्रयोग हो रहा है। गुजरात के केवड़िया को इलेक्ट्रिक वाहन शहर के रूप में विकसित करने की परियोजना पर काम किया जा रहा है। पीएम मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को कार्बन उत्सर्जन मुक्त यानी नेट जीरो उत्सर्जक देश बनाने का लक्ष्य दिया है। नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 175 गीगावाट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। अगले पांच वर्ष में भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन में 86 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। देश ने ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर काम करना आरंभ कर दिया है। रिलायंस और अदाणी समूह समेत कई कंपनियां पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आ रही हैं। देश में मेट्रो रेल सेवा पांच शहरों से बढ़कर 18 शहरों तक हो गई है जिससे निजी वाहनों का प्रयोग कम करने में मदद मिली है।

617 लाख करोड़ रुपये चाहिए

यदि पृथ्वी को सुरक्षित और संरक्षित रखना है तो वर्ष 2050 तक 8.1 ट्रिलियन डालर यानी लगभग 617 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। स्टेट आफ फाइनेंस फार नेचर की बीते साल आई रिपोर्ट में उल्लिखित इस आंकड़े का जिक्र यूएनईपी ने किया है। अगले 18 वर्ष तक प्रतिवर्ष दुनिया को लगभग 410 अरब रुपये का निवेश करना होगा। प्रकृति आधारित उपायों पर वार्षिक निवेश वर्ष 2030 तक तीन गुना बढ़ाना होगा जबकि 2050 तक यह वृद्धि चार गुना करनी होगी। यदि वर्ष 2020 को आधार वर्ष मानें तो यह राशि फिलहाल लगभग 108 खरब रुपये प्रतिवर्ष है।

ग्लोबल वार्मिंग

वर्ष 1880 के बाद से पृथ्वी के तापमान एक लगभग एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है।
लैंसेट के अनुसार इस सदी के अंत तक पृथ्वी का तापमान 2.7-3.1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाने का अनुमान है।
धरती गर्म होने से ध्रुवों पर बर्फ पिघलेगी और समुद्र का स्तर बढ़ने से द्वीपीय शहर डूब सकते हैं।

द बेजोस कोष ने दिए सात अरब रुपये

द बेजोस पृथ्वी कोष ने विश्व वन्यजीव कोष को सात अरब रुपये से अधिक की राशि दी है।
इस राशि से मैंग्रोव (खारे या अद्र्धखारे पानी के इर्द गिर्द उगने वाले वृक्षों का विशाल समूह) का संरक्षण किया जाएगा। समुद्री शैवाल की खेती बढाई जाएगी और वनों की कटान रोकने का प्रयास होगा।

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