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भारत में होने वाले सबसे ज्यादा फ्रॉड

आंकड़ों के मुताबिक भारत में लोग बड़ी संख्या में डिजिटल लेन-देन कर रहे हैं. इसके बावजूद सिक्योरिटी इशूज में कोई कमी नहीं आई है. शिक्षा की कमी और ऑनलाइन भुगतान के बारे में जानकारी कम होने के कारण अधिकांश लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं. आज हम आपको पांच ऐसी ऑनलाइन धोखाधड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं लोग जिसका सबसे ज्यादा शिकार होते हैं. हालांकि, थोड़ी सावधानी के साथ इससे आसानी से बचा जा सकता है.

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फिशिंग स्कैम
स्कैमर्स संस्थाओं से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर यूजर्स को बरगला सकते हैं. ऑनलाइन ट्रांजेक्श और ई-कॉमर्स के नए ग्राहक ऐसी वेबसाइटों की पहचान करने और लेनदेन को पूरा करने में विफल हो सकते हैं. मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया पर ऐसी वेबसाइटों का यूआरएल मिलना आम बात है. इसके अलावा स्कैमर यूजर्स को एसएमएस ब्रॉडकास्ट करने के लिए बल्क मैसेजिंग सेवाओं का भी उपयोग करते हैं.

डाउनलोड न करें स्क्रीन शेयरिंग ऐप
आरबीआई का कहना है, ‘अगर आपके डिवाइस में कोई तकनीकी गड़बड़ी है और आपको कोई स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने की जरूरत है, तो अपने डिवाइस से पेमेंट से जुड़े सभी ऐप को डीएक्टिवेट/लॉग आउट कर दें. ऐसे ऐप तभी डाउनलोड करें जब आपको कंपनी के आधिकारिक टोल-फ्री नंबर के माध्यम से सलाह दी जाए, यदि कंपनी का कोई कर्मचारी अपने व्यक्तिगत संपर्क नंबर के माध्यम से आपसे संपर्क करता है तो ऐसे ऐप डाउनलोड न करें.

UPI फ्रॉड
भारत में सबसे ज्यादा ऑनलाइन लेन-देन UPI के जरिए होता है. ऐसे में स्कैमर्स अशिक्षित और ऑनलाइन पेमेंट की जानकारी कम रखने वाले यूजर्स को अपना शिकार बनाते हैं. UPI यूजर को स्कैमर अक्सर ऐसे मैसेज भेजते हैं, जिसमें उन्हें शानदार डील ऑफर की जाती है. इसके बाद वह थोड़ी बातचीत करते हैं और फिर पूछते हैं कि क्या वे ऑनलाइन पेमेंट करके प्रोडक्ट को बुक कर सकते हैं? इसके बाद यूजर खुशी -खुशी उनको पेमेंट करने लिए राजी हो जाते हैं और स्कैमर्स के जाल में फंस जाते हैं.

रिमोट एक्सेस / स्क्रीन शेयरिंग फ्रॉड
समय-समय पर हमने बुजुर्गों और ऑनलाइन बैंकिंग के दौरान धोखाधड़ी का शिकार होते देखा है. स्कैमर्स आमतौर पर खुद को बैंक कर्मचारियों के रूप में पेश आते हैं, जो एक निश्चित सेवा को एनेबल करना चाहते हैं या आपके फोन पर किसी परेशानी को हल करना चाहते हैं. यदि वे समस्या का समाधान नहीं करते हैं तो वे आपको आपके बैंक अकाउंट के परिणामों और उनके खतरों के बारे में चेतावनी देंगे.

क्यूआर कोड से घोटाला
क्यूआर कोड स्कैम ने भारत में अपनी जगह बना ली है क्योंकि अधिकांश लोग अपने स्मार्टफोन से ऑनलाइन पेमेंट करते वक्त क्यूआर कोड का उपयोग करते हैं. आरबीआई ने अपने एक सर्कुलर में कहा है कि ज्यादातर स्कैमर्स ग्राहकों को संपर्क करके उनसे क्यूआर कोड को स्कैन करने के लिए कहते हैं. स्कैमर्स लोगों को उनके फोन पर बैंकिंग एप्लिकेशन का उपयोग करने के लिए आश्वस्त करते हैं और जैसे ही यूजर कोड को स्कैन करते हैं उनके अकाउंट से स्कैमर पैसे चुरा लेते हैं.

सर्च इंजन रिजल्ट में हेरफेर
बहुत से लोग अपने बैंकों, बीमा कंपनियों और व्यापारियों के कॉन्टैक्ट डिटेल प्राप्त करने के लिए सर्ज इंजन का सहारा लेते हैं. आमतौर पर यह बहुत अच्छे से काम करता है, लेकिन कभी-कभी धोखेबाज SEO जैसी तकनीकों का उपयोग करके वास्तविक वेबसाइट में हेरफेर किए गए क्रेडेंशियल्स को रैंक कर देते हैं जिससे ग्राहक असली बैंक वेबसाइट के बजाय फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं और वहां नंबर ले लेते हैं.

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