Homeपॉलिटिक्सनीतीश सीएम तो प्रशांत किशोर असहजता से भरे

नीतीश सीएम तो प्रशांत किशोर असहजता से भरे

नीतीश कुमार एनडीए से नाता तोड़कर महागठबंधन के मुख्यमंत्री बन गए और इसके बाद से प्रशांत किशोर बड़े असहज से हैं। प्रशांत किशोर जो कभी नीतीश कुमार के करीबी हुआ करते थे, अब उन्हें फूटी आंखों नहीं सुहाते। यही स्थिति प्रशांत किशोर की भी है। नीतीश कुमार की सरकार और उनकी आलोचना से अब वह कोई परहेज नहीं करते। राजनीति के अंदरखाने में एक खबर और चल रही है। एक प्रमुख दल के नेता ने कहा कि इसका असर प्रशांत किशोर की कंपनी पर पड़ रहा है। चुनाव प्रचार अभियान के लिए विपक्षी दल के कुछ नेता कतराने लगे हैं।

उदाहरण के तौर पर बताया गया कि बीजू जनता दल (बीजेडी) के नेता नवीन पटनायक से प्रशांत किशोर की बातचीत चल रही थी। नवीन पटनायक दो सप्ताह पहले दिल्ली के दौरे पर आने वाले थे। इस दौरान उनकी प्रशांत किशोर से मुलाकात तय थी, लेकिन ऐन वक्त पर उड़ीसा के मुख्यमंत्री ने इसे रद्द कर दिया। बताते हैं कि नवीन पटनायक की राय प्रशांत किशोर के बारे में बहुत अच्छी नहीं है। उन्हें प्रशांत किशोर में अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति प्रेम दिखाई देता है।
दक्षिण भारत के एक राजनीतिक दल के नेता ने बताया कि प्रशांत किशोर की तरफ से उनके नेता से संपर्क साधा गया था। उन्हें इसकी पक्की जानकारी है कि यह संपर्क फलीभूत नहीं हो पाया। क्योंकि उनके नेता को संदेह हैं कि प्रशांत किशोर और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का अंदरखाने में अभी कुछ रिश्ता है। तृणमूल कांग्रेस की एक नेता का कहना है कि प्रशांत किशोर ममता बनर्जी को गोवा लेकर गए थे। तृणमूल कांग्रेस ने वहां विधानसभा चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन नतीजा यह आया कि वहां भाजपा की सरकार बन गई। सूत्र का कहना है कि यदि तृणमूल कांग्रेस गोवा में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के इरादे से गई होती तो इसका नतीजा कुछ और होता।
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