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झारखंड में बिजली संकट , 6 से 8 घंटे तक बिजली कटौती जारी

झारखंड में बिजली की भयंकर किल्लत और लोड शेडिंग के बीच मंगलवार को मांग रिकार्ड स्तर 2500 मेगावाट तक पहुंच गया है। इसकी वजह गर्मी को बताया जा रहा है, जिसके कारण पीक आवर के साथ-साथ दिन में भी बिजली की किल्लत हो गई है। इसका अलावा शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली कटौती के तौर पर दिख रहा है। इसके मुकाबले विभिन्न स्त्रोतों से लगभग 2000 मेगावाट बिजली राज्य को उपलब्ध हो रही है। इसमें सर्वाधिक 350 मेगावाट तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड (टीवीएनएल) की दोनों यूनिटों से हो रहा उत्पादन है।

इसके अलावा बिजली की जरूरत निजी उत्पादक इकाइयों इनलैंड पावर, आधुनिक पावर समेत, नेशनल ग्रिड, सोलर इनर्जी कारपोरेशन से खरीदकर पूरी करनी पड़ती है। सोलर इनर्जी कारपोरेशन से राज्य सरकार ने 700 मेगावाट और 500 मेगावाट पवन ऊर्जा के लिए बिजली वितरण निगम ने पूर्व में समझौता किया था। इन स्त्रोतों से लगभग 300 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो रही है।

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इसके अलावा पीक आवर में इंडिया इनर्जी एक्सचेंज से 400 से 500 मेगावाट बिजली खरीदने बिजली वितरण निगम को आनलाइन बोली लगाना पड़ रहा है। राज्य की जरूरत के लिहाज से बिजली 12 रुपये प्रति यूनिट की अधिकतम दर पर मिल रही है। फिलहाल मांग के मुकाबले सिर्फ दस प्रतिशत बिजली की इनर्जी एक्सचेंज से मिल रहा है। इससे पीक आवर में बिजली संकट अधिक है।

अभी क्या है बिजली की स्थिति

बिजली की अधिकतम मांग – 2600 मेगावाट
कितनी हो रही आपूर्ति – 2100 मेगावाट
तेनुघाट की दो यूनिटों से 350 मेगावाट उत्पादन
डीवीसी से 500 मेगावाट
आधुनिक पावर से लगभग 150 मेगावाट की आपूर्ति
इनलैंड पावर से अधिकतम 50 मेगावाट
नेशनल ग्रिड और एनटीपीसी से अधिकतम 800 मेगावाट
सोलर इनर्जी कारपोरेशन से 300 मेगावाट
इनर्जी एक्सचेंज से अधिकतम 200 मेगावाट तक

कैबिनेट में सभी मंत्रियों ने उठाया बिजली संकट का मुद्दा
कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को सरकार के तमाम मंत्रियों ने प्रदेश में बिजली संकट का मामला उठाया। बैठक के बाद कांग्रेस कोटे के मंत्री बन्ना गुप्ता, डा. रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम व अन्य मंत्रियों ने इसकी पुष्टि भी की। बन्ना गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बिजली बकाया मद में भुगतान करने के बाद स्थिति में सुधार का भरोसा दिया। सभी क्षेत्रों से परेशानी होने की खबरें आ रही हैं, जिसके कारण सीएम से चर्चा करना जरूरी था। झामुमो कोटे के मंत्री जगरनाथ महतो ने भी यही बात दोहराई।

ईस्टर्न जोनल काउंसिल में उठी मांग, कोल कंपनियों से दिलाएं बकाया राशि

ईस्टर्न जोनल काउंसिल की 12वीं स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में झारखंड सरकार की ओर से अधिकारियों ने कोल कंपनियों से बकाया राशि दिलाने की मांग रखी है। इसके साथ ही मांग रखी गई कि मयूराक्षी का अधिक पानी झारखंड को मिले। बैठक में तीन राज्यों के मुख्य सचिव समेत विभिन्न प्रदेशों के वरीय आइएएस अधिकारी मौजूद थे और राज्यों के बीच के मसलों पर अधिक से अधिक चर्चा हुई। झारखंड का प्रतिनिधित्व वित्त विभाग के प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह और गृह विभाग के अपर सचिव ए. डोडे कर रहे थे।

12वीं स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह ने झारखंड का पक्ष रखते हुए अनुरोध किया कि सीसीएल, बीसीसीएल और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा झारखंड की जमीन पर माइनिंग का कार्य कई वर्षों से किया जा रहा है, परंतु उनके द्वारा झारखंड सरकार को विगत वर्षों का रेंट और सलामी नहीं दिया जा रहा है। इन राशि को झारखंड सरकार को जल्द दिया जाए ताकि विकास कार्यों को निष्पादित किया जा सके।

उन्होंने मयूराक्षी डैम के पानी का संयुक्त नियंत्रण झारखंड एवं पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों को दिए जाने पर तथा झारखंड राज्य को अधिक मात्रा में पानी दिए जाने का भी अनुरोध किया। साथ ही मयूराक्षी डैम के पानी के नियंत्रण के संबंध में गठित ज्वाइंट कंट्रोल मेकैनिज्म में झारखंड को सम्मिलित करने हेतु अनुरोध भी किया। बैठक में पेंशन से संबंधित मामलों का समाधान गृह विभाग, भारत सरकार के सहयोग से करने का निर्णय लिया गया । वहीं बिहार स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के तहत संपत्ति एवं दायित्व को द्विपक्षीय रूप से हल करने की बात कही गयी। बैठक के दौरान दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों से सकारात्मक बातें हुईं।

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