Homeदेशराजस्थान के सिक्युरिटी गार्ड नरेंद्र ने कायम की युवाओं के लिए मिसाल

राजस्थान के सिक्युरिटी गार्ड नरेंद्र ने कायम की युवाओं के लिए मिसाल

प्रतिभा सुविधाओं और सहूलियतों की मोहताज नहीं होती है। इसे चरितार्थ कर दिखाया है राजस्थान के अलवर जिले के गांव पहाड़ी के नरेंद्र ने। दिल्ली से सटे हरियाणा के सोनीपत के गोहाना में एक कंपनी में सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले नरेंद्र ने अपनी दिन रात की मेहनत से एनडीए की परीक्षा में 267वीं रैंक हासिल कर भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट भर्ती होकर देश सेवा करने जा रहे हैं। यहां पर बता दें कि दो दिन पहले एनडीए की परीक्षा का परिणाम आया तो नरेंद्र की खुशी का ठिकाना न रहा। इस परीक्षा में उन्हें 267वीं रैंक मिली है और उनका लेफ्टिनेंट बनने का सपना जल्द पूरा होने जा रहा है।

बचपन में ही तय कर लिया था सेना में जाने का सपना
नरेंद्र के पिता रोहताश के पास राजस्थान के अलवर में सिर्फ दो बीघा जमीन है और मां धौली देवी गृहिणी हैं। नरेंद्र का बचपन से ही सेना में अफसर बनने का सपना था। उन्होंने अपने गृह जिले अलवर में यूनिक स्कूल से 2019 में दसवीं की पढ़ाई पूरी की। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते उनकी आगे की पढ़ाई में परेशानी आने लगी। हां, यह अलग बात है कि नरेंद्र ने सेना में जाने का सपना बचपन में ही तय कर लिया था, इसलिए मुश्किलें तो आईं, लेकिन हौसला सब पर भारी पड़ा।

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गुरु ने बढ़ाया हाथ तो मुश्किल राह भी हो गई आसान
कठिनाई के दौरान नरेंद्र को शिक्षक सुमित यादव का साथ मिला। शिक्षक सुमित ने नरेंद्र का हाथ थामकर चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। गुरु का साथ मिला तो सपने को पूरा करने के लिए नरेंद्र ने उनके मार्गदर्शन में कड़ी मेहनत की और अब सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर ज्वाइन करने जा रहे हैं।

खर्च कम कर और रुपये बचाकर ली ट्रेनिंग
अपने बचपन का सपना पूरा करने के लिए नरेंद्र ने अलवर जिले से 11वीं तक की पढ़ाई करने के बाद अपना घर छोड़ दिया। इसके बाद जयपुर में एक कंपनी में करीब छह माह तक सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी की। खर्च कम करके थोड़े रुपये जोड़े और एनडीए की परीक्षा और इंटरव्यू को क्वालीफाई करने के लिए चंडीगढ़ में रह कर करीब चार माह तक कोचिंग ली।

समय को मैनेज करने के लिए ली आनलाइन कोचिंग
नरेंद्र ने 12 वीं की पढ़ाई पूरी करने के लिए 2021 में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में आनलाइन आवेदन किया और नारनौल शहर के सरकारी स्कूल में दाखिल लिया। 12वीं की पढ़ाई के साथ उन्होंने एनडीए की तैयारी जारी रखी। नरेंद्र ने आनलाइन कोचिंग भी ली। फिर मई, 2021 में एनडीए की परीक्षा दी। परीक्षा पास करने के बाद नवंबर में इंटरव्यू दिया। इसके बाद बृहस्पतिवार को परिणाम आया तो पता लगा वे पास हो गए।

सपना पूरा होता देख दोस्तों के सामने नम हो गई आंखें
नरेंद्र ने दैनिक जागरण संवाददाता परमजीत सिंह को बताया कि एनडीए की परीक्षा में उन्हें 267वां रैंक मिला है। शुक्रवार को स्वजन ने उनको परिणाम की जानकारी दी तो खुशी का ठिकाना न रहा। लेफ्टिनेंट का सपना पूरा होता देख नरेंद्र की आंखें नम हो गईं। कंपनी के साथी कर्मचारियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। शनिवार दोपहर साढ़े बारह बजे वे अपने गांव के लिए रवाना हो गए।

एक माह से गोहाना में कर रहे थे नौकरी
जयपुर में सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी कर चुके नरेंद्र फिलहाल करीब एक माह से गोहाना में गार्ड की नौकरी कर रहे थे। जिस कंपनी में वह नौकरी कर रहे थे उसका फिलहाल गोहाना क्षेत्र में दिल्ली-अमृतसर-कटड़ा एक्सप्रेस तैयार कर रही कंपनी से अनुबंध है। नरेंद्र 12वीं की परीक्षा देने के बाद गोहाना में सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी करने आए थे।

12 घंटे ड्यूटी करते चार घंटे सोते और फिर पढ़ाई करते
नरेंद्र ने बताया कि वे सिक्युरिटी गार्ड की 12 घंटे तक ड्यूटी करते थे। शाम सात बजे से अगली सुबह सात बजे तक ड्यूटी पर रहते। इसके बाद कमरे पर आकर स्नान करते और खाना खाकर सो जाते। वे चार घंटे की नींद लेते और उसके बाद आनलाइन कक्षा लेते और खुद पढ़ाई करते। उन्हें सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी करते हुए करीब 10,000 रुपये मासिक वेतन मिला था।

कड़ी मेहनत करके नौ किलोग्राम वजन किया कम
नरेंद्र बताते हैं कि जब उन्होंने मई, 2021 में एनडीए की परीक्षा दी थी तो उनका वजन 78 किलोग्राम था। एनडीए में कद के हिसाब से उनका अधिकतम वजन 70 किलोग्राम होना चाहिए था। उन्होंने कड़ी मेहनत की और नौ किलोग्राम वजन कम किया। जब फिजिकल टेस्ट हुआ तो उनका वजन 69 किलोग्राम था। अब भी वे वजन को उतना ही बरकरार रखे हुए हैं।

घर के हालात ने सपने को दी मजबूती
नरेंद्र के परिवार की आर्थिक हालत बहुत कमजोर है। मात्र दो बीघे जमीन में परिवार का ठीक से खर्च नहीं चल रहा था। माता-पिता को कई बार अपनी इच्छाएं दबानी पड़ती थीं। नरेंद्र का कहना है कि जब वे एनडीए की तैयारी करते थे तो घर के हालात उनके दिमाग में घूमते रहते थे। इससे उनके सेना में अफसर बनने के सपने को मजबूती मिली।

 

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