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    राकेश टिकैत ने गिनाई सबका साथ-सबका विकास मुद्दे की कमियां

    भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत केंद्र सरकार पर आए दिन हमलावर होते ही रहते हैं। वो किसान आंदोलन के दौरान से ही सरकार से खफा है और अभी तक चल रहे हैं। इसी वजह से वो आए दिन किसी न किसी योजना की खामियां गिना ही देते हैं। ताजा मामले में उन्होंने फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है, इस बार उन्होंने सबका साथ-सबका विकास मुद्दे की कमियां गिनाई है। अपने इंटरनेट मीडिया एकाउंट पर ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है कि जिला पंचायत का बजट अपने समर्थित सदस्यों के इलाके में आवंटित करना “सबका साथ-सबका विकास” में सबसे बड़ी बाधा है। प्रदेश सरकार स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं का निर्वहन जिलों में सुनिश्चित कराए तभी जनता का विश्वास बढ़ेगा। प्रदेश तरक्की करेगा।

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    मालूम हो कि किसान आंदोलन के दौरान राकेश टिकैत तीनों कृषि कानूनों को लेकर काफी एक्टिव थे, उन्होंने कहा था कि इस बार के विधानसभा चुनाव में किसान भाजपा सरकार को मजा चखा देंगे, किसान बहुल विधानसभा इलाकों में जमकर विरोध किया जाएगा और भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ेगा। 11 माह से अधिक समय तक चले इस विरोध में हजारों करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। 26 जनवरी के दिन किसानों के ट्रैक्टर मार्च ने पूरी दुनिया में देश की छवि को खराब किया।

    तीनों कृषि कानूनों को खत्म किए जाने के मुद्दे पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से किसान नेताओं की कई दौर की वार्ता हुई मगर कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आ सके। आखिर में एक दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वंय जनता के सामने आकर कह दिया कि तीनों कृषि कानून खत्म किए जा रहे हैं। उसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन खत्म किया था।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस घोषणा के बाद किसानों ने धरना प्रदर्शन स्थलों से वापस लौटना शुरू किया था। यूपी गेट से राकेश टिकैत ने इसके बाद बकायदा एक घर वापसी यात्रा निकाली थी, उसके बाद वो पूरे लाव लश्कर के साथ अपने घर को वापस गए थे। अभी भी उनकी कुछ मांगे शेष रह गई है जिसके लिए वो अक्सर अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते रहते हैं।

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