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    RIC दूर कर देगा भारत-चीन टेंशन,पुतिन के दूत ने दे दिया संकेत

    नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच दिल्ली में दुनियाभर के प्रमुख देशों की बड़ी-बड़ी हस्तियों का जमावड़ा लग रहा है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी भारत और यहां अपने समकक्ष एस. जयशंकर से मुलाकात की। उनके दौरे की विशेष बात यह रही कि हाल के दिनों में भारत यात्रा पर आए प्रमुख विदेशी मेहमानों में वह अकेले शख्स थे जिनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मिले। लावरोव ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संदेश प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचाया। बाद में उन्होंने यह संकेत भी दे दिया कि भारत और चीन के बीच स्थिति एक हद से ज्यादा खराब नहीं हो, रूस यह सुनिश्चित करने के प्रयास में हमेशा रहेगा।

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    क्या है RIC
    रूस-भारत-चीन यानी आरआईसी (Russia-India-China or RIC) की संकल्पना रूस के तत्कालीन विदेश मंत्री येव्गेनी प्रिमाकोव (Yevgeny Primakov) ने 1998 में की थी। वो पश्चिमी देशों के गठबंधन से मुकाबले के लिए तीनों ताकतवर देशों को एक मंच पर लाना चाहते थे। प्रिमाकोव 1998 से 1999 तक रूस के प्रधानमंत्री भी रहे थे। इस समूह का मकसद बहुपक्षीय हितों को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे वैश्विक प्रशासनिक संस्थानों में सुधार पर जोर देना है। हालांकि, समूह के नेताओं की बैठक पिछले कुछ वर्षों से ही शुरू हुई।
    रिक मूल रूप से एक-दूसरे पर भरोसा करने और इस भरोसे को मजबूती देने के प्रयास के तहत अस्तित्व में आया है, यह कोई सामरिक साझेदारी नहीं है। रिक देशों के पास दुनिया की 19 प्रतिशत जमीन है और दुनिया की जीडीपी में इसका करीब 35 प्रतिशत का योगदान होता है। तीनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं। इनमें दो, रूस और चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के स्थायी सदस्य हैं जबकि भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी दिन-ब-दिन मजबूत होती जा रही है।

    लावरोव के संकेत और क्वाड बनाम रिक
    लावरोव की बातचीत में यह संकेत भी साफ तौर पर उभरा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को रोकने के लिहाज से बने भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के समूह क्वाड (Quad) के कारण भारत को लेकर चीन का संदेह भी खत्म करने का प्रयास भी रूस करेगा। रूसी विदेश मंत्री के ये इशारे हवा-हवाई नहीं हैं क्योंकि रूस, इंडिया, चीन का संगठन रिक (RIC) इसका आधार मुहैया कराता है। आइए जानते हैं क्या है यह और क्वाड के बरक्स रिक की क्या अहमियत है?

    भारत-चीन के बीच पुल बना रूस
    नई दिल्ली और बीजिंग के बीच अनबन का इतिहास रहा है, लेकिन इस ग्रुप की खासियत यह है कि रूस दोनों देशों के बीच एक पुल का काम करता है। चीन और मॉस्को के बीच जबर्दस्त साझेदारी है जबकि नई दिल्ली और मॉस्को के बीच परंपरागत मित्रता है। हालांकि, धरातल पर ऐसा देखा नहीं जा रहा है। डोकलाम से लेकर गलवान तक, भारत और चीन के बीच कई बार तलवारें तन चुकी हैं। यह अलग बात है कि रूस, भारत और चीन के बीच लगातार संतुलन साधने की कोशिश में रहता है।

    क्वाड के आईने में रिक का महत्व
    उधर, भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के संगठन क्वाड (Quad) में आई ताजगी से भी रिक की चमक फीकी पड़ गई है। हिंद-प्रशांत महासागर में चीन की दादागीरी पर अंकुश लगाने के लिए क्वाड की गतिविधियां जोर पकड़ने लगी हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चीन, रूस और भारत के बीच बातचीत के जरिए आपसी सहमति बनाने के उद्देश्य में रिक अक्सर असफल ही रहेगा।

    भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रिक की मीटिंग में कहा भी था कि मूल चुनौती विचारों और नियमों की नहीं बल्कि व्यवहार की है। यह किसी से छिपा नहीं है कि भारत को चीन के व्यवहार से नाराजगी रहती है। तो सवाल है कि क्या क्वाड और रिक, दोनों की सदस्यता भारत को उलझन में डालने वाला है? एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसा नहीं है। दोनों समूहों की सदस्यता भारत की सामरिक, राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से मजबूती ही प्रदान करेगी। आखिर, बिल्कुल विरोधी ताकतों के बीच भी बातचीत का सिलसिला जारी रहना कूटनीति का तकाजा होता है क्योंकि इससे सुलह के रास्ते पर बढ़ने की गुंजाइश बनी रहती है।

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