Homeलाइफस्टाइलबुरी संगत में पड़ने बचाएं अपने बच्चे

बुरी संगत में पड़ने बचाएं अपने बच्चे

कहते हैं कि बच्चों को समझाना सबसे मुश्किल काम है। यह तब और भी मुश्किल हो जाता है, जब बच्चे टीनएज में होते हैं। यह टाइम पेरेंट के लिए भी बहुत कंफ्यूजिंंग होता है क्योंकि उन्हें ध्यान रखने और नजर रखने के बीच एक बैलेंस बनाकर चलना होता है। इस बात को टीनएज बच्चों के पेरेंट अच्छी तरह समझ सकते हैं। कई बार ऐसा होता है कि हम बच्चों की मेंटल हेल्थ को अच्छा रखने के लिए उन्हें अपनी मर्जी से जीने देते हैं लेकिन कभी-कभी ये बात बच्चों के लिए सही साबित नहीं होती। कई लोग बच्चों को मिसगाइड कर देते हैं जिससे बच्चे गलत डायरेक्शन में जाने लगते हैं। फ्रीडम के नाम पर बच्चे अनुशासन खो देते हैं और मनमानी करने लगते हैं। एक पेरेंट होने के नाते आप भी अपने बच्चे को संभाल सकते हैं। आपका बच्चा अगर गलत संगत में पड़ गया है, तो कुछ ऐसे तरीके हैं, जो आपकी हेल्प कर सकते हैं।

बच्चे से बात करें 
सबसे पहले तो बच्चे पर गुस्सा करने की बजाय बच्चे से आराम से बात करें और उससे पूछें कि वह ऐसी एक्टिविटी क्यों कर रहा है? आपको कुछ भी कहने से पहले बच्चे की बातों को सुनना चाहिए। जिससे कि बच्चा बिना डरे सच बोले।

बच्चे को मारना-पीटना सॉल्यूशन नहीं 
बच्चे को बिल्कुल भी वायलेंस से ट्रीट न करें। ऐसा करने से बच्चे के मन में गुस्सा भरेगा और वह उसी काम को करने का मन बना लेगा, जिससे कि उसे मना किया जा रहा है इसलिए आपको बच्चे से आराम से बात करनी है बिना गुस्से के।

कोई किस्सा सुनाएं 
बच्चों से बात करने का यह तरीका भी हो सकता है। आप उसे कोई बुरी संगत के रिजल्ट वाला किस्सा भी सुना सकते हैं। उन्हें बताएं कि वक्त के साथ दुनिया कितनी तेजी से बदली है, ऐसे में उन्हें लोगों के उद्देश्यों को समझना बहुत जरूरी है जिससे वे सही-गलत में फर्क कर सके।

बच्चे से बात करें 
सबसे पहले तो बच्चे पर गुस्सा करने की बजाय बच्चे से आराम से बात करें और उससे पूछें कि वह ऐसी एक्टिविटी क्यों कर रहा है? आपको कुछ भी कहने से पहले बच्चे की बातों को सुनना चाहिए। जिससे कि बच्चा बिना डरे सच बोले।

बच्चे को मारना-पीटना सॉल्यूशन नहीं 
बच्चे को बिल्कुल भी वायलेंस से ट्रीट न करें। ऐसा करने से बच्चे के मन में गुस्सा भरेगा और वह उसी काम को करने का मन बना लेगा, जिससे कि उसे मना किया जा रहा है इसलिए आपको बच्चे से आराम से बात करनी है बिना गुस्से के।

कोई किस्सा सुनाएं 
बच्चों से बात करने का यह तरीका भी हो सकता है। आप उसे कोई बुरी संगत के रिजल्ट वाला किस्सा भी सुना सकते हैं। उन्हें बताएं कि वक्त के साथ दुनिया कितनी तेजी से बदली है, ऐसे में उन्हें लोगों के उद्देश्यों को समझना बहुत जरूरी है जिससे वे सही-गलत में फर्क कर सके।

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