Homeपॉलिटिक्सआदिवासियों पर फोकस करने की तैयारी में शिवराज सिंह चौहान

आदिवासियों पर फोकस करने की तैयारी में शिवराज सिंह चौहान

भोपाल। भाजपा मध्य प्रदेश में आदिवासी कल्याण के कार्यक्रम को प्रमुखता से लागू कर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वर्ग को बड़ा संदेश देना चाहती है। मध्य प्रदेश ही नहीं, छत्तीसगढ़ में भी सत्ता के समीकरण तय करने में आदिवासी वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका देखते हुए भाजपा विशेष रणनीति के तहत काम कर रही है। मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में राज्यपाल भी आदिवासी वर्ग से ही नियुक्त करने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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मालूम हो कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी वर्ग से आने वाले विधायकों के साथ डिनर कर चुके हैं। आने वाले दिनों में भी आदिवासी वर्ग पर फोकस करते हुए कई कार्यक्रम और योजनाएं तैयार किए जा रहे हैं। मप्र से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत की। तो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी भोपाल में आयोजित वन समितियों के सम्मेलन में कई सौगातें दी हैं। मध्यप्रदेश में की जा रही इन सभी कवायद का फायदा छत्तीसगढ़ में भी मिलने का दावा भाजपा कर रही है।

मप्र भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐतिहासिक उपलब्धियां दी हैं। उन्हें वन संपदा का मालिकाना हक दिया है। राजनीतिक स्थान और सम्मान दिया है। गरीब कल्याण की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ प्राप्‍त किया है। नि:शुल्क राशन से लेकर बच्‍चों की पढ़ाई हो या स्वास्थ्य की सुविधा मध्य प्रदेश के जनजाति वर्ग को इसका लाभ मिल रहा है। जनजातीय महापुरुषों की गौरव गाथा और सम्मान को सरकार ने जन जन तक पहुंचाया है। जनजाति गौरव दिवस पर लिए गए संकल्पों को पूरा किया गया है। निश्चित तौर पर अन्य राज्यों में भी मध्य प्रदेश भाजपा सरकार का उदाहरण उपलब्धियों के तौर पर बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार मप्र के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी आदिवासी वर्ग का साथ मिलने पर ही भाजपा सत्ता का सफर तय कर सकती है। भौगोलिक स्थिति भी देखें, तो दोनों राज्यों की सीमा क्षेत्र में आदिवासी वर्ग का बड़ा प्रभाव है। भाजपा मध्य प्रदेश में आदिवासी कल्याण के कार्यक्रम को प्रमुखता से लागू कर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वर्ग को बड़ा संदेश देना चाहती है। पार्टी का दावा है कि मध्य प्रदेश में तो 2023 में सत्ता बरकरार रहेगी, छत्तीसगढ़ में भी वापसी के लिए हम तैयार हैं। दोनों राज्यों की आदिवासी संस्कृति और सामाजिक ढांचे में बड़ी समानताएं भाजपा के लिए सुविधाजनक हैं। मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग के कल्याण की योजनाएं, जिंदगी में बदलाव और सम्मानजक जीवन का संदेश छत्तीसगढ़ भी जाएगा।

मालूम हो कि छग में खैरागढ़ विस सीट के उपचुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव प्रचार में मप्र की उन सभी योजनाओं का प्रमुखता से उल्लेख किया, जो आदिवासी वर्ग के कल्याण से जुड़ीं थीं। इधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने भी छग के दौरे में इन योजनाओं की जानकारी साझा करते हुए इसके अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार की बात कही। दरअसल, मध्य प्रदेश जैसी ही स्थिति छत्तीसगढ़ में भी है। राज्य की 90 में से 29 सीटें एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।

इसमें अधिक सीटें अपने खाते में रखने वाले दल को ही सत्ता मिल सकी है। वर्ष 2003 एसटी के लिए 34 सीटें आरक्षित थीं, तब भाजपा ने 25 सीटें जीती थीं और सत्ता का रास्ता तय हो सका था। 2008 में आरक्षित सीटें घटकर 29 हो गईं, तो भाजपा के खाते में 19 आईं। 2013 में 29 में से 11 सीटें मिलने पर पार्टी को इस वर्ग में घटती लोकप्रियता का अंदाजा हो गया, लेकिन कारगर उपाय के अभाव में 2018 में भाजपा को 29 सीटों में से महज 3 पर जीत मिल सकी। इस चुनाव में भाजपा को कुल 15 सीटें ही मिलीं। 68 सीटें जीतकर कांग्रेस ने सरकार बनाई।

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