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कांग्रेस को झटका देने की तैयारी में सुनील जाखड़ , दे सकते है इस्तीफ़ा

पंजाब में कांग्रेस को जल्‍द ही बड़ा झटका लग सकता है। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष सुनील जाखड़ पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। सुनील जाखड़ ने कांग्रेस की अनुशासन समिति द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया है। सुनील जाखड़ के अगले सियासी सफर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठता है कि जाखड़ भाजपा, आम आदमी पार्टी या किसी अन्‍य दल का दामन थामेंगे या फिलहाल सियासी गतिविधियों से दूर रहेंगे।

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जाखड़ ने नहीं दिया कांग्रेस अनुशासन समिति की नोटिस का जवाब
जाखड़ को कांग्रेस द्वारा जारी नोटिस का आज तक जवाब देना था लेकिन उन्होंने न तो जवाब दिया और न ही सामने आकर कोई प्रतिक्रिया दी है। माना जा रहा है कि पार्टी के रुख से जाखड़ इतने ज्यादा निराश हैं कि वह कांग्रेस को अलविदा कह सकते हैं।

माना जा रहा है कि आने वाले एक दो दिन में जाखड़ अपनी स्थिति स्पष्ट कर देंगे। वहीं, जाखड़ द्वारा जवाब नहीं दिए जाने से कांग्रेस पार्टी की भी परेशानी बढ़ गई है। या तो कांग्रेस सुनील जाखड़ को पुन: नोटिस जारी करेगी या फिर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड करेगी। पार्टी को दोनों में से एक फैसला लेना ही होगा।

बता दें कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की शिकायत पर कांग्रेस की अनुशासनात्मक कमेटी ने सुनील जाखड़ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 11 अप्रैल को जारी इस नोटिस में कहा गया है कि उन्होंने पार्टी के लीडर के खिलाफ अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग किया और पंजाब में विधायक दल का नेता चुनते समय सांप्रदायिक सोच अपनाया। इस पर पार्टी ने उन्हें 7 दिन में जवाब देने के लिए कहा था।

विधान सभा चुनाव के दौरान जाखड़ ने बयान दिया था कि 42 विधायकों के वोट के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री इसलिए नहीं बनाया गया क्योंकि वह हिंदू थे। जाखड़ के इस बयान पर चुनाव परिणाम आने के एक माह बाद पार्टी ने नोटिस लिया।

वहीं, सात दिन का समयावधि खत्म होने के बावजूद जाखड़ ने पार्टी के नोटिस का जवाब नहीं दिया। बताया जा रहा है कि जाखड़ अब कांग्रेस में रहने के मूड में नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने पार्टी को कोई जवाब नहीं दिया है। सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके जाखड़ पार्टी से लंबे समय से खफा है।

पहले बतौर प्रधान सुनील जाखड़ पार्टी हाईकमान को कैप्टन अमरिंदर सिंह के फैसलों को लेकर अपनी रिपोर्ट भेजते रहे लेकिन हाईकमान ने कभी भी उस तरफ ध्यान नहीं दिया। जब स्थिति बद से बदतर होने लगी तो पार्टी ने सबसे पहले उन्हें ही प्रदेश प्रधान के पद से हटाया। वहीं, जब हाईकमान ने जाखड़ को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया तो जमीन पर ऐसी स्थिति तैयार की गई कि हिंदू होने के कारण वह मुख्यमंत्री नहीं बन सके।

करीबी सूत्र बताते हैं कि यही कारण है कि जाखड़ ने अब कांग्रेस को अलविदा कहने का मन बना लिया है। हालांकि उन्होंने अभी इस संबंध में कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। अब देखना होगा कि पार्टी उन पर कार्रवाई करती है या जाखड़ उससे पहले अपना अगला कदम उठाते है।

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