Homeपॉलिटिक्सआम आदमी के घर बनाने का सपना हुआ महंगा

आम आदमी के घर बनाने का सपना हुआ महंगा

इंदौर। लगातार बढ़ रही महंगाई ने घर चलाना मुश्किल कर ही दिया है, अब घर बनाने का सपना देखना भी आसान नहीं रहा है। सीमेंट के दाम एक बार फिर बढ़ाए जा रहे हैं। प्रदेश में सीमेंट की बिक्री के लिहाज से सबसे बड़े बाजार इंदौर में सोमवार से ब्रांडेड कंपनी की सीमेंट के दाम 425 रुपये प्रति बोरी हो जाएंगे। शनिवार को इंदौर के बाजार में सीमेंट के दाम 410 रुपये प्रति बोरी थे। सीमेंट के बढ़ते दाम पर ब्रेक नहीं लगा। अब फिर से दाम वृद्धि की जा रही है।

मालूम हो कि जनवरी में शहर में सीमेंट 340 से 350 रुपये प्रति बोरी बिक रही थी। 11 अप्रैल को ही सीमेंट के दामों में 35 रुपये की भारी भरकम वृद्धि की गई थी। इसे 14 वर्षों में हुई सबसे बड़ी मूल्यवृद्धि करार दिया गया था। 11 अप्रैल के बाद सीमेंट 400 रुपये प्रति बोरी बिकने लगी। 10 दिनों में 10 रुपये और बढ़ गए और अब दाम 410 रुपये हो गए। इसके बाद भी सीमेंट के बढ़ते दाम पर ब्रेक नहीं लगा। अब फिर से दाम वृद्धि की जा रही है। सीमेंट विक्रेता के अनुसार इस बीच बाजार में खबरें आ रही हैं कि मई माह तक कीमतें 450 रुपये बोरी तक पहुंचाई जा सकती हैं। सोमवार यानी 25 अप्रैल से सीमेंट के दामों में 15 रुपये प्रति बोरी की वृद्धि की जा रही है। इसी के साथ सीमेंट में मूल्यवृद्धि के लिहाज से अप्रैल 2022 नया रिकार्ड कायम करने वाला महीना भी बन जाएगा। इस एक माह में ही सीमेंट के दामों में 50 रुपये से ज्यादा की वृद्धि हो जाएगी।

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प्रदेश में सीमेंट की बिक्री के लिहाज से सबसे बड़े बाजार इंदौर में सोमवार से ब्रांडेड कंपनी की सीमेंट के दाम 425 रुपये प्रति बोरी हो जाएंगे। शनिवार को इंदौर के बाजार में सीमेंट के दाम 410 रुपये प्रति बोरी थे। जनवरी में शहर में सीमेंट 340 से 350 रुपये प्रति बोरी बिक रही थी। 11 अप्रैल को ही सीमेंट के दामों में 35 रुपये की भारी भरकम वृद्धि की गई थी। इसे 14 वर्षों में हुई सबसे बड़ी मूल्यवृद्धि करार दिया गया था। 11 अप्रैल के बाद सीमेंट 400 रुपये प्रति बोरी बिकने लगी। 10 दिनों में 10 रुपये और बढ़ गए और अब दाम 410 रुपये हो गए। इसके बाद भी सीमेंट के बढ़ते दाम पर ब्रेक नहीं लगा। अब फिर से दाम वृद्धि की जा रही है। सीमेंट विक्रेता यूसुफ लोखंडवाला के अनुसार इस बीच बाजार में खबरें आ रही हैं कि मई माह तक कीमतें 450 रुपये बोरी तक पहुंचाई जा सकती हैं।

इंदौर रियलेटर वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि निर्माण सामग्री के दामों में इजाफा होने से लोगों को बजट गड़बड़ा रहा है। ज्यादातर मध्यमवर्गीय परिवार कर्ज लेकर निर्माण करते हैं और कीमतें बढ़ने से निर्माण अधूरा रखना पड़ रहा है। शहर में भी प्लाटों की बिक्री फिलहाल ज्यादा हो रही है। बिल्डर भी प्लाटों पर निर्माण कर बेचने से फिलहाल बच रहे हैं।

ऐसे बढ़े दाम –

सीमेंट – 2020 में 355, 2021 में 355, 2022 में 410 रुपये प्रति बोरी

सरिया – 2020 में 44000 से 45000, 2021 में 52000 से 55000, 2022 में 72000 से 77000 रुपये प्रति टन

टाइल्स व सैनिटरी सामग्री – 2020 में 28 से 30, 2021 में 28 से 30, 2022 में 47 से 48 रुपये प्रति वर्गफीट

महंगा कोयला
सीमेंट की महंगाई के लिए महंगे होते कोयले को कारण बताया जा रहा है। महंगी सीमेंट से पुराने निर्माण कांट्रेक्ट टूट रहे हैं। कई ठेकेदारों ने निर्माण रोक दिए हैं। इससे बाजार में बिक्री भी प्रभावित हो रही है। डिस्ट्रीब्यूटर कहते हैं कि महंगे दाम की शिकायत हमसे हर कोई कर रहा है। कंपनियां कारण बता रही हैं कि कोयले के बढ़ते दाम इसकी वजह है। जो कोयला बीते दिनों तक 4 से 7 रुपये किलो सीमेंट फैक्ट्रियों को मिल रहा था, वह अब 17 से 18 रुपये प्रति किलो में मिल रहा है। इसके साथ डीजल के दाम भी प्रति लीटर 100 रुपये से अधिक हो चुके हैं। इसके कारण सीमेंट का लागत मूल्य बढ़ गया है।

सरिया दाम
जानकारी हो कि सरिये के दाम भी ऊंचे बने हुए हैं। कोरोनाकाल के पहले से अब तक सरिये के दाम में 20 हजार रुपये टन की वृद्धि हो चुकी है। सीमेंट और सरिया मिलकर सामान्य मकान बनाने के खर्च में कम से कम 400 रुपये वर्गफीट की वृद्धि कर चुके हैं।भवन निर्माण के काम आने वाला टीएमटी सरिया 72000 रुपये से 75000 रुपये टन बिक रहा है। 10 दिन पहले के मुकाबले सरिये के दामों मेें 5000 रुपये प्रति टन की कमी आई है, फिर भी सरिया महंगा ही है।

टाइल्स-
सैनिटरी 40 प्रतिशत महंगे – सीमेंट और सरिया ही नहीं, मकान में लगने वाली टाइल्स और सैनिटरी सामग्री के दामों में भी चार-पांच महीने में करीब 40 प्रतिशत की मूल्यवृद्धि हो चुकी है। दाम बढ़ने से बिक्री बिल्कुल रुक गई है। इंदौर टाइल्स सैनिटरी व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार पहले 30 से 32 रुपये वर्गफीट के दाम से बिकने वाली टाइल्स फरवरी तक 43 रुपये वर्गफीट तक बिक रही थी। यह अभी 48 रुपये है। इसके 52 से 55 रुपये वर्गफीट के करीब जाने की आशंका है। ईंधन के दामों में आई तेजी को इसकी वजह बताकर निर्माता कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं। इससे 1 हजार वर्गफीट के छोटे मकान में भी सिर्फ टाइल्स का खर्च 15000 रुपये तक बढ़ गया है।

प्रोजेक्ट पूरा करना मुश्किल
क्रेडाई के अध्यक्ष का कहना है कि प्रोजेक्ट में होने वाले खर्च को जोड़कर एक संभावित लागत तय की जाती है। उसके आधार पर ही बुकिंग होती है। यदि खर्च में ज्यादा बढ़ोतरी हो जाए तो फिर प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पाते हैं। फिलहाल सीमेंट, लोहे के भाव बढ़ने पर ऐसे ही हालात हो रहे है।

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