Homeलाइफस्टाइलपितृ पक्ष में कौआ को क्यों देते है खाना

पितृ पक्ष में कौआ को क्यों देते है खाना

पितरों की तिथि के दिन श्राद्ध किया जाता है, पितरों की पसंद का भोजन बनाया जाता है. इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और दान दक्षिणा भी देते हैं. इस दिन एक और काम करते हैं, भोजन का एक हिस्सा निकालकर कौआ को खिला देते हैं. पितृ पक्ष में कौआ को भोजन क्यों देते हैं? इसका भी अपना एक महत्व है.

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पितृ पक्ष में कौआ का महत्व
पितृ पक्ष के समय में या फिर अमावस्या को या किसी के श्राद्ध कर्म में आपने देखा होगा कि भोजन का कुछ अंश कौआ को खिला देते हैं. इससे जुड़ी मान्यता यह है कि यदि कौआ उस भोजन के अंश को ग्रहण कर लेता है तो आपके पितर तृप्त हो जाते हैं. कहा जाता है कि कौआ के द्वारा खाया गया भोजन सीधे पितरों को प्राप्त होता है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसका कौआ योनि में जन्म होता है. इस वजह से भी माना जाता है कि कोआ के माध्यम से भोजन पितरों तक पहुंचता है. यदि कौआ आपका दिया भोजन नहीं खाता है तो इसका अर्थ है कि आपके पितर आप से संतुष्ट और प्रसन्न नहीं हैं.

कौआ और श्रीराम की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में इंद्र देव के पुत्र जयंत ने कौआ का रूप धारण किया था. उस कौआ ने एक दिन सीता जी के पैर में चोंच मार दी, यह घटना राम जी देख रहे थे. उहोंने एक तिनका चलया तो वह कौआ की एक आंख में जाकर लग गया. इससे उसकी एक आंख खराब हो गई.उस कौआ ने श्रीराम से अपनी गलती के लिए माफी मांगी और क्षमा याचना करने लगा. इस पर प्रभु राम प्रसन्न हुए और उसे आशीर्वाद दिया कि पितृ पक्ष में कौआ को दिया गया भोजन का अंश पितृ लोक में निवास करने वाले पितर देवों को प्राप्त हो.इस वजह से कौआ को भोजन देते हैं.

कौआ के अलावा इन्हें भी देते हैं भोजन
श्राद्ध का भोजन सिर्फ कौआ को ही नहीं दिया जाता है. उसका कुछ अंश गौ माता, कुत्ता औार पक्षियों को भी दिया जाता है. यदि ये भोजन स्वीकार नहीं करते हैं तो इसे पितरों की नाराजगी का संकेत माना जाता है.

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