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विश्व पृथ्वी दिवस : शहरीकरण के कारण लगातार घट रहा भूमि का उपजाऊपन

जालंधर। शहरीकरण के तेजी से बढ़ हो रहे दायरे व भौतिकवाद के युग का असर धरती पर पड़ रहा है। जिले में भले ही कृषि योग्य रकबा बढ़ा है परंतु धरती की उपजाऊ शक्ति को अच्छा खासा नुकसान झेलना पड़ रहा है। गेंहू और धान की फसल के अलावा शहरी करण के विस्तार की बदौलत भूजल स्तर भी तेजी से गिर रहा है। 2001 में 110 फीट की खुदाई पर ट्यूबवैल लगते थे जो वर्तमान में करीब 500 फीट पर लग रहे है। पानी को लेकर लोग सजग नही हुए तो आने वाले दिनों में घोर संकट से जूझना पड़ेगा।

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मिट्टी की उपजाऊ शक्ति हो रही कमजोर
कृषि अधिकारी डा. नरेश गुलाटी कहते हैं कि जिले की मिट्टी का जैविक मादा 0.45 सामान्य है। खेतों को पूर्ण रूप से पौष्टिक तत्व न मिलने की वजह से यह दर 0.2 के करीब पहुंच गई है. दो दशक पहले पंजाब में माह, मूंग, अरहर तथा चने की खेती की जाती थी जिससे मिट्टी को पौष्टिक तत्व मिलते थे। समय गुजरने के साथ जिले में दालों की खेती तकरीबन लुप्त हो गई और 75 फीसद रकबे पर गेंहू व धान की खेती होने लगी। नतीजतन मिट्टी की क्वालिटी कमजोर और पानी का स्तर गिरने लगा।

मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को मजबूत करने के लिए 17 पौष्टिक तत्वों की जरूरत है। इनमें से नाइट्रोजन, फारफोरस और पोटाश खादों के रूप में तथा सूर्य की रोशनी और आक्सीजन कुदरत से मिलने के अलावा अन्य तत्वों की कमी पूरी नही हो रही है। हालांकि पिछले बीस साल में कृषि योग्य भूमि में हलका इजाफा हुआ है। दरिया के कुछ हिस्से तथा तालाब बंद होने वाली जगह भी लोगों ने खेती शुरू कर दी है।

पर्यावरण सरंक्षण पर काम करने वाले पहल संस्था के प्रधान इंजीनियर लियाकत सिंह कहते है कि ज्यादातर गांवों में तालाब बंद हो चुके है या फिर उन्हें पक्का करने से भी समस्याएं आ रही है। वेटलैंड भी लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है, इससे पंजाब में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या कम होगी। पेड़ विकास की बलि चढ़ रहे हैं। इसकी भरपाई के लिए लगाए जा रहे पौधे भले ही वन क्षेत्र के ग्राफ को थोड़ा बढ़ा रहे हैं परंतु उनकी देखभाल न होने से महज खानापूर्ति हो रही है।

बीस वर्ष में दोगुणा हुई इंडस्ट्री
जालंधर:बीस वर्ष पहली की बात करें तो कुल 7000 इंडस्ट्री थी। अब जिला उद्योग केन्द्र की रिपोर्ट के मुताबिक जालंधर में इंडस्ट्री की गिनती दोगुणी यानि 14000 तक पहुंच गई है। समय के साथ-साथ नई इंडस्ट्री जालंधर में लगनी शुरु हो गई। जालंधर के फोकल प्वाइंट, गदईपुर, इंडस्ट्री एरिया, इंडस्ट्रीयल एस्टेट, लेदर कंपलेक्स, सर्जिकल कम्पलेक्स, वरियाणा कम्पलेक्स में इंडस्ट्री लगी हुई है। जालंधर फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन एसोसिएशन के प्रधान नरिंदर सिंह सग्गू ने कहा कि बीस वर्ष पहले सात हजार इंडस्ट्री थी। अब गिनती 14000 पहुंच गई। समय के साथ-साथ मांग के मुताबिक शहर में नई इंडस्ट्री लगनी शुरु हुई। सरकार ने जगह मुहैया करवाने के बाद ही जालंधर में नई-नई इंडस्ट्री लगनी शुरु हुई।

लोगों को जागने की जरूरत
दोआबा कालेज के भूगोल विभाग के मुखी डा. दलजीत सिंह कहते है कि शहरीकरण और धरती से हो रहे खिलवाड़ के चलते कुदरत के विपरित परिस्थितियां पैदा हो रही है। उन्होंने लोगों को जागरूक हो कर पृथ्वी की रक्षा करने की बात कही है।

  • खेतों में फसलों की नाड़ को आग न लगाए। इससे मिट्टी के मित्र कीड़े मर जाते है, जो उपजाऊ शक्ति को प्रभावित करते है।
  • वाटर हारवेस्टिग सिस्टम लगा कर भू जल स्तर को सामान्य किया जा सकता है।
  • गर्मियों में एसी की गर्म हवा पर्यावरण में गर्माहट पैदा करती है।
  • जिले में हर साल 6000 हजार तथा हर गांव में 450 साल पौधरोपण करने चाहिए.
  • घर के प्रांगण छोटा सा बाग जरूर बनाए।

भू जल स्तर (ग्राउंड लेवल से मीटर में)

ब्लाक 2011 2020

जालंधर पूर्वी 28.98 36. 4

आदमपुर 8.15 11.00

जालंधर पश्चिमी 26.7 32.33

भोगपुर 18.7 25.87

नकोदर 20.07 26.89

शाहकोट 26.75 26.68

लोहिया खास 17.70 24.99

फिल्लोर 16.31 22.57

नूरमहल 18.60 26.09

रुड़का कला 25.40 27.5

——-

तालाब

2001 – 1248

2021 – 725

—-

जंगलात क्षेत्र (हेक्टेयर)

2001- 3977

2021 – 5600

कृषि योग्य रकबा (हेक्टेयर)

2001- 237944

2021 – 242975.

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